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Facelift of Muzaffarpur City : मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी से अच्छा तो एक आदर्श गांव बसा देते

March 18, 2023 | by Goltoo

Muzaffarpur : मुजफ्फरपुर में कलमबाग चौक पर ट्रैफिक की समस्या बढ़ेगी आज से एक और लेन कि ऊँचाई या ब्रेकर जैसा ढांचा बनाए जाने के लिए बंद किया गया। बनने के बाद आप सब कहेंगे इसकी क्या जरूरत थी। जैसे की ट्रैफिक लाइट महज दिखाने भर के लिए साल भर से आंख मिचौली कर रही है। कल एक लेन के बंद होने से दिनभर समस्या बनी रही। ट्रैफिक पुलिस के कार्य की सराहना करनी होगी सीमित संसाधनों के बावजूद लोगों को परेशानी न हो इसकी कोशिश करते दिखे बिना ब्रेक के। अतिक्रमण पर करवाई होता तो रास्ता सुगम होता, इस बेतरतीब निर्माण से क्या परिणाम निकलेंगे यह समय और जनता बताएगी।

Kalambagh chowk Muzaffarpur
Kalambagh chowk Muzaffarpur
Kalambagh chowk Muzaffarpur


कमोबेश मुजफ्फरपुर शहर की समस्या एक जैसी है. हर सड़क कभी भी कोई निर्माण कार्य के लिए बंद कर दिया जाता है पिछले कुछ सैलून में समृत सिटी बनाने के नाम पर जनता अब यही कह रही की गावं ही रहें देते तो शटद अच्छा था. क्योंकि दुनियाभर में अब प्रदुषण के लिए जाना जाने लगा है मुजफ्फरपुर को.


बड़े अधिकारी जब निकलते है हैं को उनके लाव -लश्कर से भी परेशानी होती है. क्योंकि उनकी गति न रुके इसके लिए उनके सुरक्षा प्रहरी आगे बढ़ कर आम जनता को हड़का रास्ता बना लेते हैं और उनके जाने के बाद लोग एक दूसरे के सामने खड़े हो एक दूसरे से भीड़ जाते हैं.


अतिक्रमण पर कोई करवाई होते दीखता नहीं दुकानों के सामान सड़क पर रखे जाते हैं. मोतीझील. क्लब रोड. जवाहरलाल रोड हर सड़क की स्तिथि एक जैसी है. मोतीझील फ्लाईओवर मुंबई का जुहू-चौपाटी बन गया है जहाँ चाट पकौड़े,फल ,खिलौने सभी मिलेंगे. उच्च स्तरीय पार्किंग तो है ही. फ्लाईओवर के दूसरी तरफ ऑटो वालों का आतंक बना रहता है (भगवानपुर ओवरब्रिज एक और उदाहरण है). मोतीझील में आगे बढ़ेंगे तो कुछ साड़ियां पहने मूर्तियों को सड़क पर देख आपके कदम भी रुक जायेंगे. कुछ दुकानों के सामने बाइक ऐसे लगे होते हैं जैसे नगर निगम ने सड़क भी किराये पे दे रखा हो. रही सही कसर ख़राब सड़क पर आप जब पैदल चलेंगे तो कहेंगे ‘पैदल चालन में भी हेलमेट लगाना जरुरी है’, या तो लहरिया बाइक ठोक देगा या आप उबर- खाबड़ सड़क पर न गिर जाएँ.

Kalambagh chowk Muzaffarpur


फेसलिफ्ट का काम जोरों पर यानि शहर का फेसिअल किया जा रहा है अर्थात स्थायी कार्य नहीं हो रहे. पहले कोरोना , फिर बेतरतीब निर्माण निगम द्वारा और बाजार की चरमराती व्यवस्था से मुजफ्फरपुर में आर्थिक निरसता आई है. एक समय बिहार की आर्थिक राजधानी के नाम से मशहूर था मुजफ्फरपुर और आज व्यापर के सुगम साधन विलुप्त हो रहे हैं. चौक चैराहों पर ट्रैफिक और अतिक्रमण के कारण व्यवसाय करना कठिन हो गया है मुजफ्फरपुर में. बड़े बड़े शो रूम खुल रहे है और पार्किंग स्थल गायब हो रहे हैं. अगले कुछ वर्षों में कलमबाग रोड और मतीझील में अंतर नहीं रह जायगा.
ट्रैफिक और अतिक्रमण पर ठोस कदम से शहर की सूरत बदल जाए पर कौन करेगा यह कार्य?

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