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RDS College “भारत में मानवाधिकार: समकालीन विमर्श” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

July 16, 2024 | by Goltoo

@goltoo-39

Muzaffarpur 16 July : RDS College के इतिहास विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग एवं पीयूसीएल के संयुक्त तत्वावधान में “भारत में मानवाधिकार: समकालीन विमर्श” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

मानवाधिकार जन्मसिद्ध अधिकार है, इसे कोई छिन नहीं सकता: प्रो के के झा

RDS College राष्ट्रीय संगोष्ठी

रामदयालु सिंह महाविद्यालयt के इतिहास विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग एवं पीयूसीएल के संयुक्त तत्वावधान में “भारत में मानवाधिकार: समकालीन विमर्श” विषय पर आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में पीयूसीएल के अध्यक्ष प्रो के के झा ने कहा कि मानव का अधिकार जन्मसिद्ध अधिकार है। कोई भी इसे छिन नहीं सकता है। मानवाधिकार एक कवच की तरह है जो विपरीत परिस्थिति में मानव की रक्षा करते हैं।

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मानवाधिकार एक नियमों की तरह, जिसे हम सभी पालन करते हैं। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ हम कानून की शरण में जाते हैं। मानव अधिकारों के मूल में सम्मान, समानता, स्वतंत्रता, गैर भेदभाव, सहिष्णुता, न्याय और जिम्मेदारी के महत्व को समझने की जरूरत है। पीयूसीएल जैसी संस्था भारतीय संविधान में निहित मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अनवरत प्रयास करती है।

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सामाजिक कार्यकर्ता श्री शाहिद कमाल ने मानवाधिकार उल्लंघन की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानवाधिकार का उल्लंघन करता है तो इसमें पुलिस की बर्बरता, सरकारी अधिकारी एवं संस्था द्वारा शोषण के मामले आते हैं। वर्तमान समय में मानव तस्करी के मामले, महिलाओं और बच्चों के यौन शोषण को रोकने की दिशा में पीयूसीएल जैसी संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। छात्रों को इन संस्था से जुड़कर समाज में मानव अधिकार संबंधी जागरूकता फैलाना चाहिए।

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इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ संजय कुमार सुमन ने कहा कि पीयूसीएल देश के अग्रणी नागरिक स्वतंत्रता संगठनों में से एक है। पीयूसीएल के माध्यम से न्यायालय में कई मामले दायर किए गए हैं जिसके कारण ऐसे ऐतिहासिक फैसले आए हैं जिन्होंने भारत में मानवाधिकार का विस्तार किया है।

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संगोष्ठी में विषय प्रवेश कराते हुए राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ रजनीकांत पांडे ने कहा कि 1948 में मानव अधिकार घोषणा पत्र द्वारा संयुक्त राष्ट्र ने मानव अधिकारों की घोषणा की जिसमें जीने का अधिकार, स्वतंत्रता, शिक्षा, समानता,सूचना पाने तथा राष्ट्रीयता का अधिकार स्वीकार किए गए। इन्हीं बिंदुओं पर लगातार विमर्श की आवश्यकता है।

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इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एम एन रिजवी ने पौधे एवं अंग वस्त्रम देकर आगत अतिथियों का सम्मान किया। बताया कि पीयूसीएल सभी वर्गों के लोगों के बीच मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता के बारे में जागरूकता फैलाने का कार्य करता है।

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अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ अनिता सिंह ने मानवाधिकार पर सारगर्भित व्याख्यान के लिए वक्ताओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने नैसर्गिक अधिकार और शिक्षा के अधिकार पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि नैसर्गिक रूप से सबों को जीने का अधिकार है और शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। छह से चौदह वर्ष के आयु में सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का जो कानूनी प्रावधान है, उसे पीयूसीएल के माध्यम से धरातल पर लागू कराने का प्रयास करना होगा।

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कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ ललित किशोर और धन्यवाद ज्ञापन डॉ अजमत अली ने किया.

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कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ ललित किशोर और धन्यवाद ज्ञापन डॉ अजमत अली ने किया


कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय पेंशनर सेल के अध्यक्ष प्रो के के सिंह, डॉ अनुपम कुमार, डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ एम एन रिजवी, डॉ राकेश कुमार सिंह, डॉ राजीव कुमार, डॉ सौरभ राज, डॉ मनीष कुमार शर्मा, डॉ मीनू कुमारी, डॉ ईला, डॉ वंदना, श्री राजेश कुमार “गोल्टू” श्री विजय कुमार तिवारी, श्री मनीष कुमार एवं सैकड़ो की संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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