Headlines

LS College कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 144 वीं जयंती का आयोजन

LS College
Advertisements

Muzaffarpur 1 August : LS College के हिंदी विभाग द्वारा सुप्रसिद्ध साहित्यकार कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 144 वीं जयंती का आयोजन जे बी कृपलानी सभागार में किया गया।

LS College मुंशी प्रेमचंद की जयंती

LS College कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 144 वीं जयंती का आयोजन
LS College कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 144 वीं जयंती का आयोजन

आज के इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो डॉ ओ पी राय ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य ने कहा कि प्रेमचंद हमको जीवन जीने की कला सिखाते हैं। उनका साहित्य हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। भारतीय जीवन की झांकी के जिस आदर्श को प्रेमचंद ने अपने साहित्य में चित्रित किया है उससे आज के विद्यार्थी नई दिशा पा सकते हैं। मुख्य वक्ता के रूप में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो राजीव कुमार झा प्रेमचंद के समग्र साहित्य पर प्रकाश डाला। उपन्यासकार के रूप में, कहानीकार के रूप में, नाटककार के रूप में, पत्रकार के रूप में हम प्रेमचंद को कैसे पढ़ें? इस पर उन्होंने बहुत गंभीरता से अपनी बात रखी।

LS College कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 144 वीं जयंती का आयोजन
LS College कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 144 वीं जयंती का आयोजन

हरिशंकर परसाई के के माध्यम से प्रेमचंद के जीवन संघर्ष को याद किया। गोदान के किसानी संघर्ष को आज के किसान जीवन से जोड़कर देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जीवन की मानवीय संवेदनाओं गहनता से चित्रित करने वाले इकलौते कथाकार हैं। हिंदी साहित्य प्रेमचंद का हमेशा ऋणी रहेगा। डॉ राजेश्वर कुमार ने कहा कि प्रेमचंद अपने समय के सामाजिक जकड़न को तोड़ते हैं। प्रेमचंद पर लिखी आत्मकथाओं कलम का सिपाही,प्रेमचंद घर में,कलम का मजदूर की चर्चा कर प्रेमचंद के जीवन को रेखांकित किया।रामविलास शर्मा, डॉक्टर धर्मवीर आदि विभिन्न विद्वानों के मार्फत उन्होंने प्रेमचंद के पुनर्पाठ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब तक हम मनुष्य बने रहेंगे तब तक प्रेमचंद का साहित्य हमारे भीतर मनुष्यता का प्रवाह करता रहेगा।

इस मशीनी युग में अपने को मनुष्य के रूप में बचा पाना प्रेमचंद जैसे महान साहित्यकारों के साहित्य को पढ़कर ही संभव हो सकता है। ठाकुर का कुआं, सद्गति, पूस की रात आदि कहानियों तथा गोदान, रंगभूमि, गबन आदि उपन्यासों के माध्यम से प्रेमचंद की मूल चिंता और संवेदनाओं पर अपनी बात बहुत साफगोई से रखी। ऋषि राज,रामविलास,भारती,प्रीति आदि ने भी प्रेमचंद पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर शिवेंद्र कुमार मौर्य ने स्वागत डॉ विजय कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ राधा कुमारी ने किया।कार्यक्रम के इस मौके पर प्रो एस के चतुर्वेदी, प्रो राजीव कुमार, प्रो विजय कुमार, डॉ मनीष झा, डॉ शशिकांत पांडेय, डॉ एस एन अब्बास, डॉ इम्तियाज आलम,करिश्मा,रंजन,ऋतु,नेहा,खुशबू,आदि सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे।