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Bihar University एवं भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “छात्र शिक्षक संवाद”

September 5, 2024 | by Goltoo

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Muzaffarpur 5 September : B.R.A. Bihar University दर्शनशास्त्र विभाग एवं भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “छात्र शिक्षक संवाद” पर आयोजित परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ ललित किशोर, भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सचिव सह प्राध्यापक इतिहास विभाग आरडीएस कॉलेज ने कहा कि हमारे देश में सम्यक संवाद की एक दीर्घ परंपरा रही है। समाज में अनेक समस्याओं का समाधान संवाद में ही निहित है। वर्तमान समय में समाज संवाद से संवादहीनता की ओर बढ़ने लगा है। हमारा इतिहास और दर्शन हमें स्वस्थ संवाद करने की ओर प्रेरित करता है। स्वस्थ संवाद के माध्यम से हम तमाम तरह के मनोवैज्ञानिक समस्याओं से बच सकते हैं।

B.R.A. Bihar University

Bihar University एवं भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में "छात्र शिक्षक संवाद"
Bihar University एवं भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “छात्र शिक्षक संवाद”

समाज में अनेक समस्याओं का समाधान संवाद में निहित है : डॉ ललित किशोर

शिक्षक अधिक आकर्षक और प्रभावी शिक्षण वातावरण बनाकर छात्रों की संवाद कला और शैक्षिक उपलब्धि को बढ़ावा दे सकते हैं। वर्तमान समय में शिक्षकों का दायित्व बढा है। अच्छे संवाद कला का वातावरण बनाकर वे अच्छे छात्र तैयार कर सकते हैं।
छात्र शिक्षक संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने पूछे कई अहम सवाल। छात्र शिक्षक संवाद का एक अच्छा वातावरण बना।
डॉ राजेश्वर कुमार सिंह ने गुरु शिष्य संवाद के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डाला।

Bihar University एवं भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में "छात्र शिक्षक संवाद"
Bihar University एवं भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “छात्र शिक्षक संवाद”

डॉ सरोज कुमार वर्मा ने छात्रों को बेझिझक प्रश्न पूछने और वार्तालाप करने के लिए माहौल बनाने पर बल दिया।

अध्यक्षता करते हुए डॉ एल के साह ने संवाद कला के आध्यात्मिक पहलू पर प्रकाश डाला। साथ ही योग और दर्शन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

मौके पर विभाग की अध्यक्षा डॉ एल के साह के साथ डॉ सरोज कुमार वर्मा, डॉ राजेश्वर कुमार सिंह, डॉ हिमांशु शेखर एवं डॉ पयोली उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन एवं विषय प्रवेश डॉ पयोली ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ हिमांशु शेखर ने किया.

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