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B.R.A. Bihar University शोधार्थियों के लिए 6 दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम 15 अक्टूबर से

September 22, 2024 | by Goltoo

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Muzaffarpur 22 September : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देशों के आलोक में अपने मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) के माध्यम से प्राध्यापकों और शोधार्थियों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा पर 6 दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. यह ट्रेनिंग कार्यक्रम 15 अक्टूबर से शुरू होगा जिसमे विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और शोधार्थी भाग ले सकेंगे.

B.R.A. Bihar University

कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय ने बताया कि ट्रेनिंग का उद्देश्य प्राध्यापकों और शोधार्थियों को भारतीय संस्कृति और ज्ञान के विविध पहलुओं से अवगत कराना है, ताकि वे इस ज्ञान को अपने पाठ्यक्रम और शोध कार्य में समाहित कर सकें. यह ट्रेनिंग कार्यक्रम शैक्षणिक जगत में नवीनता लाने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक होगा.

B.R.A. Bihar University शोधार्थियों के लिए 6 दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम 15 अक्टूबर से
B.R.A. Bihar University शोधार्थियों के लिए 6 दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम 15 अक्टूबर से

ट्रेनिंग कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी, जिससे प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहरी समझ प्राप्त हो सकेगी. कुलपति प्रो राय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य लक्ष्य ही भारतीय ज्ञान परंपरा को भारतीय शिक्षा के मूल में रखना है. भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परंपराओं में से एक है.

इसमें दर्शन, विज्ञान, साहित्य, कला, संगीत और योग जैसे कई क्षेत्रों का समावेश होता है. भारत के प्राचीन ग्रंथों, जैसे वेद, उपनिषद, महाभारत और रामायण में ज्ञान और विद्या की गहराई को दर्शाया गया है. यहाँ तक कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियाँ जैसे आयुर्वेद और योग भी इस ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रही हैं.

वर्तमान समय में, यह परंपरा न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपने महत्व को साबित कर रही है. विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति और ज्ञान की व्यवस्था की जा रही है, जिससे युवाओं में इसके प्रति रुचि भी बढ़ रही है, ऐसे में यह ट्रेनिंग कार्यक्रम भाग लेने वाले प्राध्यापको और शोधार्थियों के लिए निश्चित ही ज्ञानवर्धक होगा.

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