आधी रात गंगा में समाया Vikramshila Setu का हिस्सा, 34 मीटर स्लैब गिरने से बिहार की बड़ी कनेक्टिविटी प्रभावित
May 4, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur 4 May : भागलपुर में गंगा नदी पर बने 4.7 किमी लंबे Vikramshila Setu का एक हिस्सा देर रात टूटकर नदी में गिर गया। पिलर 4 और 5 के बीच 34 मीटर स्लैब ध्वस्त होने से सीमांचल समेत कई जिलों का संपर्क प्रभावित हुआ है। जानिए इस ऐतिहासिक पुल का महत्व और पूरा इतिहास।
Vikramshila Setu का हिस्सा आधी रात गंगा में समाया
आधी रात गंगा में समाया Vikramshila Setu का हिस्सा, 34 मीटर स्लैब गिरने से बिहार की बड़ी कनेक्टिविटी प्रभावित
बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बना ऐतिहासिक Vikramshila Setu एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह बेहद गंभीर है। सोमवार देर रात पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
जानकारी के मुताबिक, विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 4 और 5 के बीच करीब 34 मीटर लंबा स्लैब रात लगभग 12:55 बजे अचानक भरभराकर नदी में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि देर शाम से ही पुल के उस हिस्से में दरार और झुकाव नजर आने लगा था। कुछ वाहन चालकों ने इसकी सूचना प्रशासन को भी दी थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पूरा हिस्सा ढह गया।

स्लैब गिरने के बाद दोनों पिलरों के बीच बड़ा गैप बन गया, जिससे पुल का संपर्क पूरी तरह टूट गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त वहां कोई वाहन मौजूद नहीं था, इसलिए अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
करीब 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु बिहार के सबसे महत्वपूर्ण पुलों में गिना जाता है। यह भागलपुर को नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सुपौल और सीमांचल के कई इलाकों से जोड़ता है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से करीब 16 जिलों की सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
यह सेतु दक्षिणी छोर पर NH-80 और उत्तरी छोर पर NH-31 को जोड़ता है। इसी पुल के जरिए बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच सीधा संपर्क बना रहता है। रोजाना करीब एक लाख लोग इस पुल से यात्रा करते हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम और पश्चिम बंगाल की ओर व्यापार, माल ढुलाई और परिवहन के लिए भी यह पुल लाइफलाइन माना जाता है।
Vikramshila Setu का इतिहास
Vikramshila Setu का निर्माण बिहार के पूर्वी हिस्से को बेहतर सड़क संपर्क देने के उद्देश्य से किया गया था। इस पुल के बनने से पहले गंगा पार करने के लिए लोगों को घंटों नाव और फेरी सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। बरसात के दिनों में स्थिति और भी मुश्किल हो जाती थी।
करीब 680 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल का निर्माण 1990 के दशक में शुरू हुआ था और वर्ष 2001 में इसका उद्घाटन हुआ। उस समय इसे बिहार की सबसे बड़ी आधारभूत परियोजनाओं में गिना गया था। यह पुल भारत के सबसे लंबे नदी पुलों में शामिल है।
इसका नाम प्राचीन “विक्रमशिला महाविहार” के नाम पर रखा गया, जो भागलपुर जिले के कहलगांव क्षेत्र में स्थित था। पाल वंश के राजा धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी में इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। इतिहासकारों के अनुसार, विक्रमशिला विश्वविद्यालय कभी नालंदा विश्वविद्यालय की तरह ही विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र था, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। बौद्ध शिक्षा और तंत्र साधना के लिए यह केंद्र विशेष रूप से प्रसिद्ध था।
Muzafffarpur Triple Murder : पत्नी और मासूम बच्चों की हत्या कर ‘नई जिंदगी’ बसाना चाहता था पिता, प्रेमिका संग रची थी खौफनाक साजिश full story link https://t.co/DpKlYmuHAs #Muzaffarpur #crimenews pic.twitter.com/jCY7Gg34tv
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) May 3, 2026
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से Vikramshila Setu की स्थिति को लेकर चिंता जताई जाती रही है। वर्ष 2016 में पुल की बड़े स्तर पर मरम्मत की गई थी। उस दौरान कई बियरिंग बदले गए थे और कार्बन प्लेट लगाकर संरचना को मजबूत करने की कोशिश की गई थी। इसके बाद 2020 में भी मरम्मत कार्य हुआ था।
मार्च 2026 में पुल के पिलर संख्या 17, 18 और 19 के आसपास बनी सुरक्षा दीवारों के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद इंजीनियरिंग सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब ताजा हादसे ने इन चिंताओं को और गंभीर बना दिया है।
प्रशासन अलर्ट मोड में
घटना के बाद पुल के दोनों ओर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है और वैकल्पिक मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जा रहा है। देर रात जिलाधिकारी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
Video Call से शुरू हुआ डर, 17 लाख पर खत्म हुई ठगी: Muzaffarpur का चौंकाने वाला मामला,डिजिटल अरेस्ट क्या है? https://t.co/S7fBwOA9fO #Digitalarrest #cyberfraud #Muzaffarpur pic.twitter.com/KZ1Lu4tqX0
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) May 1, 2026
तकनीकी टीमों को पुल के बाकी हिस्सों की जांच का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे के बाद बिहार के पुराने पुलों की मजबूती, समय पर मरम्मत और निगरानी व्यवस्था को लेकर फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
RELATED POSTS
View all