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Hormuz Crisis के बीच भारत ने कैसे संभाली गैस सप्लाई?

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पैदा हुई अनिश्चितता (Hormuz Crisis) ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को चिंता में डाल दिया था। भारत के सामने भी बड़ा सवाल था कि अगर इसी रास्ते से आने वाली गैस प्रभावित हुई तो देश की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। क्योंकि भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और करीब 60 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती है। इसमें Qatar और United Arab Emirates जैसे बड़े सप्लायर शामिल हैं।

हालांकि शुरुआती आशंकाओं के बावजूद स्थिति उतनी गंभीर नहीं बनी, जितनी डर जताया जा रहा था। भारत ने तेजी दिखाते हुए अपनी ऊर्जा सप्लाई रणनीति में बदलाव किया और वैकल्पिक देशों से गैस आयात बढ़ाकर संभावित संकट को काफी हद तक टाल दिया।

Hormuz Crisis : ओमान बना भारत का सबसे बड़ा सहारा

जैसे ही होर्मुज मार्ग प्रभावित हुआ, भारत ने दूसरे सप्लायर देशों की ओर रुख करना शुरू कर दिया। इस दौरान Oman भारत के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि ओमान से होने वाला गैस निर्यात होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं है। वहां से एलएनजी सीधे अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचती रही, जिससे सप्लाई चेन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

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Hormuz Crisis के बीच भारत ने कैसे संभाली गैस सप्लाई? ओमान और अमेरिका बने बड़े सहारे
Hormuz Crisis के बीच भारत ने कैसे संभाली गैस सप्लाई? ओमान और अमेरिका बने बड़े सहारे

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में ओमान भारत को एलएनजी सप्लाई करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश था और उसकी औसत मासिक आपूर्ति लगभग 0.18 मिलियन टन थी। लेकिन मार्च और अप्रैल के दौरान यही सप्लाई बढ़कर 1.2 मिलियन टन तक पहुंच गई। यानी हर महीने औसतन 0.6 मिलियन टन गैस भारत को मिलने लगी।

अमेरिका और अफ्रीकी देशों ने भी निभाई बड़ी भूमिका

संकट के दौरान United States से भी एलएनजी आपूर्ति बढ़ाई गई। हालांकि अमेरिका से गैस आने में दूरी अधिक है, लेकिन वहां से स्थिर और लगातार सप्लाई मिलने से भारत को राहत मिली। इसके अलावा Nigeria और Angola जैसे अफ्रीकी देशों ने भी अतिरिक्त एलएनजी उपलब्ध कराकर सप्लाई गैप को भरने में मदद की।

कतर और यूएई से आयात में आई भारी गिरावट

साल 2025 में भारत हर महीने औसतन 0.95 मिलियन टन एलएनजी कतर से आयात कर रहा था, जबकि यूएई से लगभग 0.27 मिलियन टन गैस आती थी। लेकिन होर्मुज मार्ग प्रभावित होने के बाद मार्च और अप्रैल के दौरान कतर से केवल 0.06 मिलियन टन और यूएई से करीब 0.13 मिलियन टन एलएनजी का ही आयात हो पाया।

इस गिरावट ने शुरुआत में चिंता जरूर बढ़ाई, लेकिन भारत ने तेजी से दूसरे विकल्प तलाशकर स्थिति को नियंत्रण में रखा।

मार्च में गिरा आयात, अप्रैल में दिखी रिकवरी

मार्च 2026 में भारत का कुल एलएनजी आयात घटकर करीब 1.67 मिलियन टन तक पहुंच गया था। हालांकि अप्रैल में इसमें सुधार देखने को मिला और आयात बढ़कर लगभग 1.95 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह स्तर सामान्य महीनों से थोड़ा कम जरूर था, लेकिन इससे साफ संकेत मिला कि भारत ने सप्लाई चेन को सफलतापूर्वक री-एडजस्ट कर लिया है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते सप्लाई सोर्स बदलकर बड़ी ऊर्जा समस्या को टाल दिया। कतर और यूएई पर निर्भरता कम कर दूसरे देशों से आयात बढ़ाने की रणनीति ने संकट के समय देश को राहत पहुंचाई। आने वाले समय में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सप्लाई के स्रोतों में और विविधता ला सकता है, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट का सीधा असर देश पर न पड़े।

Goltoo

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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