बिना रसायन के निष्कर्षण: BRABU कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय की अगुवाई में रिसर्च टीम का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में शोध प्रकाशित
May 28, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur/Varanasi 28 May : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU)के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय की अगुवाई में भारतीय शोध दल का शोध प्रतिष्ठित Elsevier जर्नल ‘Sustainable Chemistry One World’ में प्रकाशित हुआ। सुपरक्रिटिकल फ्लूइड एक्सट्रैक्शन (SFE) तकनीक को हरित और पर्यावरण-अनुकूल समाधान बताया गया, जो बिना जहरीले रसायनों के निष्कर्षण में मदद करेगी। इस तकनीक से कृषि, फार्मास्युटिकल, चाय-कॉफी, आवश्यक तेल और पर्यावरण संरक्षण क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे।
BRABU कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय की रिसर्च टीम का अंतरराष्ट्रीय जर्नल में शोध प्रकाशित
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय की अगुवाई में छह सदस्यीय भारतीय शोध दल को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। रिसर्च टीम का समीक्षा पत्र का प्रकाशन प्रतिष्ठित एल्सेवियर के जर्नल ‘सस्टेनेबल केमिस्ट्री वन वर्ल्ड’ में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के सह-लेखकों में राजीव गांधी विश्वविद्यालय के डॉ. अशोक कुमार यादव और नानम रोन्या, तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के डॉ. अमन राठौर, ह्रादेश राजपूत और आयुषी गुप्ता शामिल हैं।
इस शोध में सुपरक्रिटिकल फ्लूइड एक्सट्रैक्शन को इस दशक की सबसे महत्वपूर्ण हरित तकनीकों में से एक बताया गया है, जो औद्योगिक प्रक्रियाओं में जहरीले रासायनिक सॉल्वैंट्स की जगह ले सकती है। जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. राय ने कहा, यह शोध केवल एक वैज्ञानिक दस्तावेज नहीं है, यह उद्योग जगत को एक व्यावहारिक विकल्प देने की कोशिश है जो पर्यावरण के साथ समझौता किए बिना उत्पादन की गुणवत्ता भी बनाए रखे।

एसएफई तकनीक में कार्बन डाइऑक्साइड को 31.1 डिग्री सेल्सियस तापमान और 73.8 बार दबाव पर एक विशेष अवस्था में लाकर सॉल्वेंट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निष्कर्षण के बाद न तो कोई रासायनिक अवशेष बचता है और न ही अधिक ताप से कीमती यौगिक नष्ट होते हैं।
प्रो. राय ने बताता कि पारंपरिक तरीकों में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वैंट्स न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि अंतिम उत्पाद में उनके अवशेष भी रह जाते हैं , एसएफई इस पूरी समस्या को जड़ से खत्म करती है।” इस तकनीक के अनुप्रयोग बेहद व्यापक हैं , चाय और कॉफी का डिकैफिनेशन, आवश्यक तेलों की रिकवरी, समुद्री स्रोतों से ओमेगा-3 फैटी एसिड का पृथक्करण, औषधीय कैनबिनोइड निष्कर्षण और कीटनाशकों व भारी धातुओं से दूषित मिट्टी का पर्यावरण-अनुकूल उपचार इसमें शामिल हैं।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) May 27, 2026
प्रो राय ने आगे बताता कि इस शोध की खास बात यह है कि यह केवल मौजूदा तकनीक का आकलन नहीं करता, बल्कि उद्योग जगत के लिए एक भविष्योन्मुखी रोडमैप भी सामने रखता है।
प्रो. राय ने कहा, “यह तकनीक भारत जैसे विशाल कृषि विविधता वाले देश के लिए विशेष रूप से आशाजनक है। बिहार और गंगा के मैदानी इलाकों में एसएफई अपनाने से कृषि उत्पादों को उच्च मूल्य मिलेगा, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनेगी और हरित विनिर्माण में कुशल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह शोध पत्र वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के तहत भारत के कृषि और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय हरित मानकों के अनुरूप ढालने के लिए एक ठोस वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
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