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Bihar Higher Education Crisis : एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, शिक्षक संकट और गिरते नामांकन पर जताई चिंता

June 17, 2026 | by Goltoo

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Patna/Muzaffarpur 17 June : Bihar Higher Education Crisis को लेकर तिरहुत स्नातक क्षेत्र के एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह ने बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में शिक्षक संकट, 60:1 छात्र-शिक्षक अनुपात, अतिथि सहायक प्राध्यापकों की स्थिति, GER और ब्रेन ड्रेन पर गंभीर चिंता जताई गई है।

Bihar Higher Education Crisis : एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

Bihar Higher Education Crisis को लेकर तिरहुत स्नातक क्षेत्र के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रो. संजय कुमार सिंह ने बिहार सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री संजय सिंह (टाइगर जी) को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पत्र में उन्होंने शिक्षक संकट, अतिथि सहायक प्राध्यापकों की असुरक्षित स्थिति, बढ़ते छात्र-शिक्षक अनुपात, गिरते नामांकन और ब्रेन ड्रेन को राज्य के भविष्य के लिए चिंताजनक बताया है।

प्रो. संजय कुमार सिंह ने कहा कि बिहार कभी नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों की धरती रहा है। लेकिन आज Bihar Higher Education Crisis के कारण बड़ी संख्या में छात्र बेहतर शिक्षा की तलाश में राज्य से बाहर जाने को मजबूर हैं।

Bihar Higher Education Crisis : एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
Bihar Higher Education Crisis : एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

211 नए कॉलेजों की योजना और Bihar Higher Education Crisis

अपने पत्र में एमएलसी ने बिहार सरकार द्वारा राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की योजना का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल भवन निर्माण से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो नए कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना बड़ी चुनौती होगी। यही कारण है कि Bihar Higher Education Crisis को दूर किए बिना उच्च शिक्षा विस्तार की योजना अधूरी साबित हो सकती है।

छात्र-शिक्षक अनुपात 60:1 तक पहुंचा

पत्र में प्रो. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित आदर्श छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 है, जबकि बिहार में यह अनुपात बढ़कर लगभग 60:1 तक पहुंच गया है।

राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्तमान में लगभग 23 से 24 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में शिक्षकों की भारी कमी का सीधा असर पढ़ाई, शोध, नवाचार और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि Bihar Higher Education Crisis का सबसे बड़ा कारण शिक्षकों की कमी है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो शिक्षा की गुणवत्ता में और गिरावट आ सकती है।

अतिथि सहायक प्राध्यापक ही संभाल रहे पूरी व्यवस्था

प्रो. संजय कुमार सिंह ने अपने पत्र में कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था काफी हद तक अतिथि सहायक प्राध्यापकों के भरोसे चल रही है।

ये शिक्षक स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाने के साथ-साथ परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, शोध गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें सेवा सुरक्षा और स्थायित्व प्राप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि Bihar Higher Education Crisis के बीच अतिथि शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी अनिश्चित स्थिति शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है।

नई शिक्षा नीति और बढ़ता प्रशासनिक बोझ

एमएलसी ने पत्र में उल्लेख किया कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू होने के बाद शिक्षकों की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ गई हैं।

Academic Bank of Credits (ABC), DigiLocker, NAAC मूल्यांकन, AISHE डेटा संकलन, विश्वविद्यालय पोर्टल अपडेट और सेमेस्टर प्रणाली से जुड़े कार्यों का भार भी शिक्षकों पर है।

उन्होंने कहा कि यदि अतिथि शिक्षकों का सहयोग न मिले तो विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। यही स्थिति Bihar Higher Education Crisis को और गंभीर बना रही है।

GER और ब्रेन ड्रेन बना बड़ी चुनौती

प्रो. सिंह ने बिहार के Gross Enrollment Ratio (GER) को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर GER लगभग 28-29 प्रतिशत है, वहीं बिहार में यह केवल 17-18 प्रतिशत के आसपास है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2035 तक GER को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करती है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य काफी चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि Bihar Higher Education Crisis का असर केवल कॉलेजों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव राज्य की बौद्धिक क्षमता और मानव संसाधन पर पड़ रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में बड़ी संख्या में छात्र अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं, जिससे ब्रेन ड्रेन की समस्या बढ़ रही है।

अतिथि शिक्षकों के लिए नई नीति बनाने की मांग

एमएलसी ने राज्य सरकार से “Associate Faculty” अथवा “वरिष्ठ संविदा शिक्षण संवर्ग” के गठन पर विचार करने का आग्रह किया है।

उन्होंने सुझाव दिया कि वर्षों से कार्यरत अनुभवी अतिथि सहायक प्राध्यापकों को स्थिर सेवा ढांचा प्रदान किया जाए, ताकि उन्हें कार्य सुरक्षा मिल सके और विश्वविद्यालयों को अनुभवी शिक्षकों का लाभ मिलता रहे।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बिहार सरकार पूर्व में 1976, 1980 और 1986 में अस्थायी शिक्षकों के नियमितीकरण से संबंधित नीतियां लागू कर चुकी है। देश के कई अन्य राज्यों में भी संविदा शिक्षकों के लिए विशेष संवर्ग बनाए गए हैं।

निष्कर्ष

प्रो. संजय कुमार सिंह का मानना है कि Bihar Higher Education Crisis केवल शिक्षकों की समस्या नहीं है, बल्कि यह बिहार के भविष्य, युवाओं के अवसरों और राज्य के बौद्धिक विकास से जुड़ा विषय है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि 211 नए कॉलेजों की स्थापना के साथ-साथ शिक्षकों की कमी, अतिथि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और गिरते नामांकन की समस्याओं का भी समाधान किया जाए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो Bihar Higher Education Crisis आने वाले वर्षों में और गंभीर रूप ले सकता है।

बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। अब यह सरकार और नीति निर्माताओं पर निर्भर करता है कि वे इस संकट को अवसर में बदलकर राज्य को पुनः ज्ञान और शिक्षा की अग्रणी भूमि बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।

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