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Muzaffarpur Book Fair में कविता, संस्कृति और शब्दों का संगम, काव्य रस में डूबा साहित्य प्रेमियों का महासमागम

June 27, 2026 | by Goltoo

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मुजफ्फरपुर पुस्तक मेले में कविता, संस्कृति और शब्दों का अद्भुत संगम, कवि सम्मेलन में देर रात तक गूंजती रहीं तालियां

स्थानीय कवियों की दमदार प्रस्तुतियों ने बांधा समां, रविवार को अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंकिता सिन्हा का एकल काव्य पाठ रहेगा मुख्य आकर्षण

Muzaffarpur 27 June : Muzaffarpur Book Fair के तीसरे दिन कवि सम्मेलन में कविता, ग़ज़ल और बज्जिका की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। रविवार को अंकिता सिन्हा का एकल काव्य पाठ होगा।

Muzaffarpur Book Fair में कविता, संस्कृति और शब्दों का संगम

आदर्श छात्रावास, कलमबाग रोड स्थित वातानुकूलित सभागार में आयोजित चार दिवसीय Muzaffarpur Book Fair 2026 के तीसरे दिन शनिवार को साहित्य, कविता और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली, पुस्तक मेला समिति (रजि.), नई दिल्ली तथा प्रज्ञा रिसर्च एसोसिएशन (प्राण), रांची के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों और स्थानीय साहित्यकारों ने कविता, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, व्यंग्य एवं लोकभाषा की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा।

Muzaffarpur Book Fair
Muzaffarpur Book Fair

कार्यक्रम का शुभारंभ समय इंडिया (ट्रस्ट) के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने सभी कवियों एवं साहित्यकारों का स्वागत कर किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले केवल पुस्तकों की बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि साहित्यिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी अभियान हैं। कार्यक्रम का संचालन मुस्कान केसरी ने किया।

कवि सम्मेलन में डॉ. पंकज कर्ण, नंदनी कुमारी, सविता राज, श्रवण कुमार, सुमन, नंदिनी कुमारी सदैव, सौरभ, मुस्कान केसरी, सुजाता शर्मा, शिल्पा श्रीवास्तव, पीयूष कुमार, शाहनवाज़ नवाज़ और पंकज नारायण सहित अनेक कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। विशेष आकर्षण बज्जिका भाषा में प्रस्तुत कविताएं रहीं, जिनमें स्थानीय संस्कृति और मिट्टी की खुशबू साफ महसूस हुई। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को अपनी लोक परंपराओं से जुड़ने का भावनात्मक अवसर प्रदान किया।

Muzaffarpur Book Fair
Muzaffarpur Book Fair

ओज कवि डॉ. पंकज कर्ण ने अपनी चर्चित पंक्तियां—
“सत्ता जहां अपराधियों की बंदगी करे, मुमकिन है लोकतंत्र वहां खुदकुशी करे।”
—सुनाकर वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया। उनकी प्रस्तुति पर सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। वहीं कवयित्री सुजाता शर्मा ने जीवन दर्शन को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हुए कहा—
“भ्रम यह है कि सब मेरा है और सत्य यह है कि कुछ भी स्थायी नहीं।”
उनकी संवेदनशील अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

पुस्तक मेले के अंतिम दिन 28 जून को आयोजित समापन समारोह का मुख्य आकर्षण अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंकिता सिन्हा का एकल काव्य पाठ होगा। शाम 4:30 बजे से होने वाले इस विशेष सत्र में वे राष्ट्रभाव, मानवीय संवेदनाओं, नारी चेतना और सामाजिक सरोकारों पर आधारित अपनी चर्चित कविताएं प्रस्तुत करेंगी। उल्लेखनीय है कि आतंकवाद के कठिन दौर में श्रीनगर के लाल चौक पर निर्भीक कविता पाठ के लिए उन्हें तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जनरल वी. के. सिंह द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

समापन समारोह में चित्रकला, कविता, कहानी सुनाओ, गायन एवं नृत्य प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों ने अधिक से अधिक संख्या में पुस्तक प्रेमियों से पुस्तक मेले में पहुंचकर पुस्तक संस्कृति से जुड़ने और अपनी पसंद की पुस्तकें खरीदने की अपील की है।

मुजफ्फरपुर के बाद झारखंड–बिहार पुस्तक मेला परिक्रमा का अंतिम पड़ाव समस्तीपुर होगा, जहां 2 से 5 जुलाई 2026 तक चार दिवसीय पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा। लगभग तीन माह तक चली इस ज्ञान यात्रा ने झारखंड और बिहार के हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यकारों तथा पुस्तक प्रेमियों को साहित्य और पुस्तक संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

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