विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर, में क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग
July 14, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur 14 July : विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर, मुजफ्फरपुर में आयोजित क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग के छठे दिन तीन महत्वपूर्ण सत्रों में शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास, भारतीय शिक्षा की भावी दिशा तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका पर गहन चिंतन हुआ। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भारतीय शिक्षा-दर्शन, भावनात्मक संतुलन तथा सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग
प्रथम सत्र में डॉ. रजनीश ने “तनाव प्रबंधन एवं भावनात्मक संतुलन” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक के समक्ष केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षण ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक संतुलन बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रभावी शिक्षक वही है जो स्वयं तनावमुक्त रहकर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बने।

उन्होंने तनाव के प्रमुख कारणों, सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन, संवाद कौशल तथा आत्मनियंत्रण पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना, अपनी प्राथमिकताओं का निर्धारण करना, आवश्यक होने पर विनम्रतापूर्वक “ना” कहना तथा अपरिवर्तनीय परिस्थितियों को स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने मार्गदर्शन एवं परामर्श (Guidance and Counselling) की उपयोगिता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर उचित परामर्श तनाव को कम करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक रूप से संतुलित शिक्षक ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। सत्र के अंत में प्रतिभागियों के प्रश्नों का उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान प्रस्तुत किया।
द्वितीय सत्र में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने “विजन, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भारतीय शिक्षा की दिशा” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत ज्ञान-आधारित समाज की ओर अग्रसर है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो ज्ञान, कौशल, चरित्र, नवाचार तथा मानवीय मूल्यों से संपन्न हों।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को पारंपरिक शिक्षण से आगे बढ़कर शोध, नवाचार, उद्यमिता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को उन्होंने शिक्षा का विकल्प नहीं, बल्कि एक प्रभावी सहायक माध्यम बताते हुए कहा कि AI सूचना और विश्लेषण उपलब्ध करा सकता है, लेकिन शिक्षक की संवेदनशीलता, नैतिक मार्गदर्शन, प्रेरणा और मानवीय संबंधों का स्थान कभी नहीं ले सकता। शिक्षक ही विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सृजनशीलता, आलोचनात्मक चिंतन, नेतृत्व क्षमता तथा जीवन मूल्यों का विकास करता है।
प्रो. राय ने कहा कि आज आवश्यकता ऐसे शिक्षकों की है जो स्वयं को आधुनिक तकनीकों के साथ निरंतर अद्यतन रखें तथा AI का उपयोग शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए करें। उन्होंने कहा, “तकनीक तभी सार्थक है, जब वह मानवीय मूल्यों के साथ जुड़कर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे।” स्वामी विवेकानंद के शिक्षा-दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य के भीतर निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना है। उन्होंने सभी आचार्यों का आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों तथा वैश्विक दृष्टि का विकास करें, जिससे विकसित भारत-2047 के निर्माण में उच्च शिक्षा संस्थान अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।
तृतीय सत्र में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री के. एन. रघुनंदन ने “राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका” विषय पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का वैभव उसके नागरिकों के चरित्र पर निर्भर करता है और इस चरित्र निर्माण का सबसे बड़ा दायित्व शिक्षक के कंधों पर होता है। शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का संवाहक होता है।
उन्होंने धर्मपाल जी की प्रसिद्ध पुस्तक The Beautiful Tree का उल्लेख करते हुए भारतीय शिक्षा परंपरा की ऐतिहासिक समृद्धि का स्मरण कराया तथा लेखिका चिमामांडा न्गोज़ी अदीची के प्रसिद्ध विचार The Danger of a Single Story का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत को केवल एकतरफा दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता। भारत को उसके वास्तविक स्वरूप में समझने के लिए उसकी संस्कृति, जीवन-पद्धति, मानवता, प्रकृति और लोकपरंपराओं को समग्रता से देखना आवश्यक है।

श्री रघुनंदन ने शिक्षा और विद्या के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा केवल सूचना का अर्जन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण है। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के समानता के विचारों का उल्लेख करते हुए भारतीयता में निहित एकात्मकता और समरसता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संदर्भ में विकास का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि मानव, समाज, संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना है। ‘धर्म’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ किसी विशेष पूजा-पद्धति या मज़हब से नहीं, बल्कि सार्वभौमिक जीवन-मूल्यों एवं कर्तव्यबोध से है। Hindu Economics का संदर्भ देते हुए उन्होंने पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने कहा कि भारत मूलतः एक विचार है, जिसकी आत्मा उसकी सांस्कृतिक चेतना, मानवीय मूल्यों और प्रकृति के प्रति सम्मान में निहित है। शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कार, वास्तविक इतिहास बोध, नैतिक मूल्यों, पर्यावरण चेतना तथा राष्ट्रनिष्ठा का विकास करें, जिससे वे भविष्य के उत्तरदायी एवं चरित्रवान नागरिक बन सकें।
दिनभर के तीनों सत्रों ने प्रतिभागी आचार्यों को मानसिक सुदृढ़ता, तकनीकी दक्षता, भारतीय शिक्षा-दर्शन तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका के प्रति नई दृष्टि प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। प्रशिक्षण वर्ग का वातावरण पूरे दिन चिंतन, संवाद और प्रेरणा से ओतप्रोत रहा।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
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