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Bihar New Degree College: Guest Teacher नहीं, अब Fixed Term Faculty से चलेगी पढ़ाई, 211 नए कॉलेजों के लिए नई नियमावली तैयार

June 18, 2026 | by Goltoo

Bihar New Degree College

Patna 18 June : Bihar New Degree College के तहत 211 नए सरकारी कॉलेजों में Fixed Term Faculty की नियुक्ति होगी। 23-40 वर्ष आयु सीमा, 100 अंकों की चयन प्रक्रिया और 16 कक्षाएं अनिवार्य होंगी।जानिए पूरी नियुक्ति प्रक्रिया।

Bihar New Degree College: Guest Teacher नहीं, अब Fixed Term Faculty

बिहार सरकार राज्य के 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। Bihar New Degree College योजना के तहत अब गेस्ट फैकल्टी की जगह फिक्स्ड टर्म फैकल्टी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से नई नियमावली तैयार की गई है। राजभवन ने प्रस्तावित ड्राफ्ट सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद (BSHEC) को भेजकर 10 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।

राज्यपाल सचिवालय की ओर से संयुक्त सचिव कल्पना श्रीवास्तव ने कुलपतियों और बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सचिव को पत्र भेजकर Bihar University Fixed Term Faculty Engagement Statute 2026 के मसौदे पर सुझाव उपलब्ध कराने को कहा है। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियमावली जारी की जाएगी।

Bihar New Degree College
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स्टीयरिंग कमेटी करेगी नियुक्ति प्रक्रिया की निगरानी

प्रस्तावित नियमावली के अनुसार फिक्स्ड टर्म फैकल्टी की नियुक्ति के लिए उच्च शिक्षा विभाग और राज्यपाल सचिवालय के समन्वय से एक स्टीयरिंग कमेटी गठित की जाएगी। यह समिति नियुक्ति प्रक्रिया की निगरानी करेगी और चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी।

Bihar New Degree College के तहत शिक्षकों का चयन 100 अंकों की प्रणाली के आधार पर होगा। इसमें शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 88 अंक तथा इंटरव्यू और शिक्षण प्रदर्शन (डेमो क्लास) के लिए 12 अंक निर्धारित किए गए हैं।

हाई स्कूल से पीएचडी तक के अंक जुड़ेंगे

चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन हाई स्कूल स्तर से किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार हाई स्कूल के लिए अधिकतम 10 अंक, इंटरमीडिएट के लिए 12 अंक, स्नातक के लिए 15 अंक और स्नातकोत्तर (पीजी) के लिए 23 अंक निर्धारित किए गए हैं।

इसके अलावा NET, JRF, M.Phil और PhD जैसी उपलब्धियों के लिए भी अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। NET के लिए 10 अंक, PhD के लिए 10 अंक, M.Phil के लिए 5 अंक, M.Phil एवं NET दोनों होने पर 15 अंक, JRF के लिए 18 अंक, PhD एवं NET के लिए 20 अंक, M.Phil एवं JRF के लिए 23 अंक तथा PhD एवं JRF दोनों योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को सर्वाधिक 28 अंक मिल सकेंगे।

इंटरव्यू में देनी होगी डेमो क्लास

Bihar New Degree College के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के दौरान शिक्षण प्रदर्शन भी करना होगा। चयन समिति के सामने उम्मीदवारों को डेमो क्लास देकर यह दिखाना होगा कि वे विद्यार्थियों को किस प्रकार पढ़ाएंगे। इसके आधार पर शिक्षण कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा और 12 अंकों का इंटरव्यू स्कोर दिया जाएगा।

23 से 40 वर्ष आयु सीमा, पीएचडी होगी अनिवार्य

नियमावली के अनुसार 23 से 40 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी फिक्स्ड टर्म फैकल्टी पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर (PG) की डिग्री और पीएचडी होना अनिवार्य होगा।

सरकार का उद्देश्य नए कॉलेजों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति कर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

नियमित नौकरी का दावा नहीं कर सकेंगे शिक्षक

राजभवन द्वारा तैयार मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि यह नियुक्ति निश्चित अवधि (Fixed Term) के लिए होगी। चयनित शिक्षक भविष्य में नियमित नियुक्ति या स्थायी नौकरी का दावा नहीं कर सकेंगे।

फिक्स्ड टर्म फैकल्टी को प्रत्येक सप्ताह कम से कम 16 कक्षाएं लेनी होंगी। इसके अलावा उन्हें परीक्षा कार्य, कॉलेज प्रशासन, शैक्षणिक गतिविधियों तथा संस्थान के अन्य कार्यों में भी लगाया जा सकता है। चयनित शिक्षकों को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित एक निश्चित मानदेय (Fixed Salary) दिया जाएगा।

पहले चरण में छह विषयों में होगी नियुक्ति

सूत्रों के अनुसार पहले चरण में राज्य के 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेजों के लिए छह विषयों में फैकल्टी नियुक्त किए जाएंगे। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र शामिल हैं। इन कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन विषयों की पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी चल रही है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि Bihar New Degree College योजना के तहत होने वाली यह नियुक्ति राज्य के नए कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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