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Bihar University राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय और लीची अनुसंधान केंद्र के साथ एमओयू

July 9, 2024 | by Goltoo

brabu

Muzaffarpur 9 July : बीआरए Bihar University ने कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा और लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय, लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक तथा पूसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक ने हस्ताक्षर किए हैं.

Bihar University MOU

Bihar University
Bihar University MOU with RAU,Pusa

संस्थानों के बीच अनुसंधान गतिविधियों और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए. मौके पर कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय ने कहा कि यह सहयोग कृषि से संबंधित अनुसंधान परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, विशेष रूप से लीची की खेती और अनुसंधान के क्षेत्र में रिसर्च की अपार संभावनाएं हैं.

Bihar University
Bihar University MOU with RAU,Pusa

कुलपति प्रो राय ने कहा कि समझौता ज्ञापन में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय और राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के बीच साझेदारी शिक्षको, शोधकर्ताओं और छात्रों के आदान-प्रदान के साथ-साथ अनुसंधान सुविधाओं और संसाधनों को साझा करना शामिल है. साथ ही आपसी सहयोग से कृषि के क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे क्षेत्र के किसानों को लाभ होगा.

Bihar University MOU with National Research Centre on Litchi
Bihar University MOU with National Research Centre on Litchi
Bihar University MOU with National Research Centre on Litchi
Bihar University MOU with National Research Centre on Litchi

कुलपति प्रो राय ने कहा कि लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के साथ समझौता ज्ञापन इस क्षेत्र के प्रमुख कृषि उत्पादों में से एक, लीची की खेती से संबंधित अनुसंधान पहल पर ध्यान केंद्रित करेगा. साथ ही यह समझौता लीची के अधिक समय तक सुरक्षित भंडारण के तरीको पर संयुक्त अनुसंधान कर नई तकनीकों के विकास का प्रयास करेगा. इस समझौता से दोनों संस्थानों की अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि होने और लीची की खेती और उत्पादन के लिए नवीन समाधानों के विकास की उम्मीद है.

इन दोनों समझौता से क्षेत्र में कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी की उन्नति को महत्वपूर्ण दिशा मिलने की उम्मीद है, जिससे अंततः किसानों और समग्र रूप से कृषि क्षेत्र को लाभ होगा. उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर की पढ़ाई प्रस्तावधीन है तथा इस समझौता से कोर्स शुरू करने तथा उसके सफल संचालन में भी मदद मिलेगी.

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