www.goltoo.in

बिहार में Government Teachers की कोचिंग पर सख्ती, शिक्षा विभाग ने जारी किया स्पष्ट निर्देश

June 12, 2026 | by Goltoo

govt teacher

Patna 12 June : बिहार सरकार ने Government Teachers के निजी कोचिंग और ट्यूशन पढ़ाने पर सख्त रोक लगाने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में Government Teachers की कोचिंग पर सख्ती

बिहार सरकार ने Government Teachers की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने सरकारी शिक्षकों के निजी कोचिंग संस्थानों और ट्यूशन सेंटरों में पढ़ाने पर सख्त रोक लगा दी है। सरकार का मानना है कि शिक्षकों का पूरा ध्यान सरकारी स्कूलों के छात्रों पर होना चाहिए।

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार (या संबंधित मंत्री के नाम के अनुसार) और विभागीय अधिकारियों की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सरकारी शिक्षक अपनी सेवा अवधि में किसी भी निजी कोचिंग या ट्यूशन गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते। यदि कोई शिक्षक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Government Teachers
Government Teachers

सरकार का तर्क है कि लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि कुछ शिक्षक स्कूलों में अपेक्षित समय और गुणवत्ता के साथ पढ़ाई नहीं कराते, जबकि निजी कोचिंग में अधिक समय देते हैं। इससे सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रभावित होती है और छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी हाल के दिनों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि सरकार हर प्रखंड में ऐसे मॉडल स्कूल विकसित करना चाहती है, जहां आम लोगों के साथ-साथ अधिकारियों और संपन्न परिवारों के बच्चे भी पढ़ना पसंद करें। उनका मानना है कि जब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, तभी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव दिखाई देगा।

बिहार में कोचिंग संस्थानों का तेजी से बढ़ता प्रभाव सरकार के सामने बड़ी चुनौती माना जा रहा है। कई क्षेत्रों में छात्र स्कूलों की अपेक्षा कोचिंग संस्थानों पर अधिक निर्भर हो गए हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम सरकारी विद्यालयों को शिक्षा का मुख्य केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि इस फैसले को लेकर शिक्षकों और शिक्षा जगत में बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए स्कूलों में बेहतर संसाधन, नियमित निगरानी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण भी सुनिश्चित करना होगा।

फिलहाल सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि सरकारी शिक्षक अब निजी कोचिंग और ट्यूशन के जरिए अतिरिक्त शिक्षण कार्य नहीं कर सकेंगे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और छात्रों के प्रदर्शन पर कितना असर पड़ता है।

RELATED POSTS

View all

view all