Muzaffarpur News
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Patna 24 September : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय पटना और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास दक्षिण बिहार के संयुक्त तत्वधान में आर्यभट्ट विश्वद्यालय में Implementation of National Education Policy 2020 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन बिहार के संदर्भ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

Implementation of National Education Policy 2020

उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रोफेसर डॉक्टर संजय पासवान, प्रोफेसर संजय कुमार कुलपति नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय, प्रोफेसर विजय सिंह कुलसचिव सरला बिरला विश्वविद्यालय रांची, प्रोफेसर रामजी सिंह कुलसचिव, भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजेश्वर कुमार, प्रोफेसर अरुण सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। प्रोफेसर अरुण जी ने सभी अतिथि का स्वागत किया। नालंदा में 16, 17,18 नवंबर को ज्ञान कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। प्रोफेसर विजय सिंह जी ने सत्र का प्रस्तावना रखा। उन्होंने भगवान कृष्ण से लेकर के गुरुकुल तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और चरित्र निर्माण व्यक्तित्व विकास पर अपना प्रकाश डाला।

Workshop on Implementation of National Education Policy 2020 in the Context of Bihar
Workshop on Implementation of National Education Policy 2020 in the Context of Bihar

उसके बाद डॉ राजेश्वर पाराशर ने विस्तृत रूप से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की कार्य पद्धति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नालंदा भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की ज्ञान की जननी रही है ।उस समय भारत विश्व गुरु कहा जाता था। भारत को परम वैभव तक पहुंचना है। उन्होंने नालंदा ज्ञान कुंभ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नालंदा ज्ञान कुंभ में लगभग 700 प्रतिभागी लोगों की उपस्थिति होनी है। यह ज्ञान कुंभ बिहार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रियान्वयन का एक नया रूपरेखा तय करेगा।

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National Education Policy 2020

उसके बाद मुख्य अतिथि प्रोफेसर संजय पासवान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शोध का बोध होना चाहिए। खुद से प्रतिरोध, अवरोध और प्रतिरोध खत्म होना चाहिए। आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार दर्शन पर भी इस ज्ञान कुंभ में चर्चा हो। उन्होंने संस्कृत को बढ़ाने के लिए जोर दिया। सत्र का समापन और धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर हरीश जी ने किया।

तृतीय सत्र की अध्यक्षता प्रो के. सी. सिन्हा ने की। मुख्य वक्ता प्रो परमेंद्र वाजपेई थे।

National Education Policy 2020

ज्ञान कुंभ पर प्रकाश डालते हुए जय प्रकाश विश्वद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो परमेंद्र वाजपेयी ने कहा कि मैकाले की शिक्षा पद्धति का विश्लेषण करने की जरूरत है। आंकलन करते हैं तो पाते हैं कि 1835 से 1947 तक भारत में आर्थिक, राजनीति में दुष्परिणाम इतने गहरे हो गए थे, उससे हम आजतक नहीं उभर पाए हैं। उस व्यवस्था का पूरा उद्देश्य क्लर्क पैदा करना था। वैचारिक तौर पर भारतवासियों को शून्य करना था। उस पद्धति पर स्वतंत्रता के बाद भारत का विकाश तो हुआ, आंकड़े भी अच्छे है लेकिन देश की समस्याओं का समाधान इसमें नहीं है। अपने यहां देश की समस्याओं पर शोध नहीं होता।

Workshop on Implementation of National Education Policy 2020 in the Context of Bihar
Workshop on Implementation of National Education Policy 2020 in the Context of Bihar


उन्होंने कहा कि हमारे यहां शिक्षा उसको दी जाती है जो उसका अधिकारी होता है। जब तक उस पर पश्चिम की मुहर नहीं लगती तब तक हम उसे बड़ा नहीं मानते हैं। पश्चिम का मॉडल हमारे लिए उपयोगी नहीं है।


अंतिम सत्र में भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजेश्वर कुमार ने ज्ञान कुंभ की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान कुंभ में 17 और 18 नवंबर को भारतीय भाषाओं को भूमिका और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका और उपादेयता विषय पर परिसंवाद का आयोजन होगा।


प्रो के. सी. सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री की 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस ज्ञान कुंभ का आयोजन महत्वपूर्ण है। यह इस तरह का आयोजन होगा कि लोग इस पर बाद में भी चर्चा करेंगे।

Goltoo

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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