Video Call से शुरू हुआ डर, 17 लाख पर खत्म हुई ठगी: Muzaffarpur का चौंकाने वाला मामला,डिजिटल अरेस्ट क्या है?
May 1, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur 1 May : Muzaffarpur के खबड़ा इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड बिजली विभाग कर्मचारी की जिंदगी उस वक्त डर और मानसिक दबाव के भंवर में फंस गई, जब एक वीडियो कॉल ने उन्हें यह यकीन दिला दिया कि वे किसी बड़े अपराध में गिरफ्तार होने वाले हैं। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि आज के दौर के सबसे खतरनाक साइबर अपराधों में से एक — “डिजिटल अरेस्ट” — का वास्तविक मामला है।
भोलाप्रसाद महतो नामक इस बुजुर्ग व्यक्ति से साइबर ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर करीब 17 लाख रुपये ठग लिए। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार की वर्षों की जमा पूंजी छीन ली, बल्कि यह भी दिखाया कि तकनीक और डर का इस्तेमाल कर अपराधी किस तरह लोगों को मानसिक रूप से कैद कर रहे हैं।
क्या है “डिजिटल अरेस्ट”?
मुजफ्फरपुर पुलिस की जांच में सबसे अहम बात यह सामने आई कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया भारत में मौजूद ही नहीं है। साइबर अपराधी लोगों की कानूनी जानकारी की कमी और सरकारी एजेंसियों के प्रति सम्मान का फायदा उठाकर उन्हें डराते हैं।
सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने स्पष्ट कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है। लेकिन ठगों की रणनीति इतनी योजनाबद्ध होती है कि लोग डर के कारण सोचने-समझने की स्थिति में नहीं रह जाते।

डर, शर्म और अकेलेपन का खेल
इस मामले में ठगों ने अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल किया। वीडियो कॉल पर खुद को CBI अधिकारी बताकर उन्होंने ऐसा माहौल बनाया मानो सामने बैठे व्यक्ति पर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हो चुका हो।
घंटों तक लगातार वीडियो कॉल पर रखकर भोलाप्रसाद महतो को मानसिक दबाव में रखा गया। उन्हें बार-बार जेल, बदनामी और परिवार के सामने अपमान का डर दिखाया गया। अपराधियों की पूरी कोशिश थी कि वे किसी परिजन या पड़ोसी से बात न कर सकें, क्योंकि एक बाहरी सलाह ही इस झूठ का पर्दाफाश कर सकती थी।
यही “डिजिटल अरेस्ट” का सबसे खतरनाक पहलू है — यह हथकड़ी नहीं लगाता, बल्कि डर के जरिए इंसान को मानसिक कैदी बना देता है।
कैसे चलता है ठगी का पूरा नेटवर्क?
पुलिस जांच में पता चला कि इस तरह के साइबर गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करते हैं। ठगी की रकम तुरंत अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। इन खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिन्हें कमीशन देकर इस्तेमाल किया जाता है ताकि असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, कई बैंक पासबुक, चेकबुक और डेबिट कार्ड बरामद किए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बैंक खातों के खिलाफ पहले से साइबर शिकायतें दर्ज थीं, फिर भी उनका इस्तेमाल जारी था।
रिटायर्ड लोग क्यों बन रहे हैं आसान निशाना?
मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 67 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया था।
साइबर अपराधी खास तौर पर रिटायर्ड लोगों को निशाना बना रहे हैं क्योंकि उनके पास रिटायरमेंट के बाद की बचत होती है। साथ ही, यह वर्ग सरकारी संस्थाओं और अधिकारियों पर जल्दी भरोसा कर लेता है। डिजिटल तकनीकों और नए साइबर अपराधों की जानकारी कम होने के कारण वे आसानी से जाल में फंस जाते हैं।
Muzaffarpur में तेज रफ्तार बस की टक्कर से ई-रिक्शा हादसे का शिकार, 5 घायल https://t.co/JEKCQHtmPb #Muzaffarpur #accident #news pic.twitter.com/HHUhfr8mtE
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) May 1, 2026
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
इस मामले में एसएसपी कांतिश कुमार मिश्रा के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई। साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी जांच और बैंक ट्रांजैक्शन की कड़ियां जोड़ते हुए गिरोह तक पहुंच बनाई।
मुख्य आरोपी विक्रम कुमार को मुजफ्फरपुर के मनियारी इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर वैशाली जिले के गोरौल क्षेत्र में छापेमारी कर दो अन्य आरोपियों — बृजेश कुमार और कृष्ण कुमार — को पकड़ा गया। हालांकि, गिरोह का एक सदस्य अभी भी फरार बताया जा रहा है।
खुद को कैसे बचाएं?
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की सलाह साफ है:
- कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
- वीडियो कॉल पर डराकर पैसे मांगना सीधा साइबर फ्रॉड है
- ऐसे किसी कॉल पर तुरंत फोन काट दें
- परिवार या स्थानीय पुलिस से तुरंत संपर्क करें
- बैंक डिटेल, OTP या निजी जानकारी कभी साझा न करें
- साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं
स्क्रीन के पीछे छिपा खतरा
Muzaffarpur की यह घटना सिर्फ एक ठगी का मामला नहीं, बल्कि डिजिटल दौर की नई हकीकत है। आज अपराधी हथियार लेकर दरवाजे पर नहीं आते, बल्कि मोबाइल स्क्रीन के जरिए डर पैदा करते हैं।
ऐसे समय में सबसे बड़ी सुरक्षा जागरूकता और सतर्कता है। अगर कोई खुद को CBI, पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाए, तो याद रखें — कानून की असली प्रक्रिया कभी व्हाट्सएप स्क्रीन पर नहीं चलती।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
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