स्वामी हरिंद्रानंद जी के इन सभी भक्तों के यहां शिव चर्चा नियमित रूप से होती है. अनुमान है 5 करोड़ की संख्या में शिव को गुरु मान चुके हैं लोग स्वामी के कहने के बाद.
Ranchi 5 September : शिव शिष्य परिवार के जनक स्वामी हरिंद्रानंद जी का निधन. स्वामी हरिंद्रानंद जी गुरु ही नहीं समाज सेवी पर्यावरणविद भी थे कोरोनावायरस शिव गुरु की महिमा पहुंचाई थी. श्री स्वामी हरिंद्रानंद जी का रविवार सुबह निधन दिल का दौरा पड़ने से हो गया. रांची में पारस अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. बाद में पल्स अस्पताल में भर्ती किया गया. स्वामी हरिंद्रानंद जी के पुत्र अजीत आनंद ने बताया हरिंद्रानंद जी का पार्थिव शरीर उनके निवास धुर्वा में लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है. सोमवार को उनका अंतिम संस्कार होगा.

स्वामी हरिंद्रानंद जी ने 1974 में आरा के एक गांव की शमशान में भगवान शिव को गुरु माना था. इसके बाद से उन्होंने शिव को अपना गुरु बनाने के बाद लोगों को कहने लगे. उनके इस व्यवहार को लोगों ने खूब सराहा और उनसे जुड़ते चले गए. पूरी दुनिया,भारत में ही नहीं देश विदेश में लाखों चाहने वाले हैं. स्वामी हरिंद्रानंद जी के इन सभी भक्तों के यहां शिव चर्चा नियमित रूप से होती है. अनुमान है 5 करोड़ की संख्या में शिव को गुरु मान चुके हैं लोग स्वामी के कहने के बाद.
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) September 4, 2022
स्वामी हरिंद्रानंद जी बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी रह चुके हैं. सिवान जिले के रहने वाले स्वामी हरिनारायण जी का बचपन से ही आध्यात्म की तरफ हो चुका था. उनका जन्म 1948 में सिवान के अमलोरी गांव में हुआ था. उन्होंने कई धार्मिक पुस्तकें भी लिखी हैं. निशुल्क पाठ्य पुस्तक के साथ-साथ निशुल्क भोजन कराने जैसे कार्य कार्यों के कारण स्वामी का दर्जा मिला है. स्वामी हरिहरानंद जी के गोलोकवासी होने से उनके भक्तों में शोक की लहर फ़ैल गई.
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