www.goltoo.in

RDS College में “नोवेल टू फिल्म” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

December 20, 2025 | by Goltoo

madhu (2)

Muzaffarpur 20 December : RDS College के स्नातकोतर अंग्रेजी विभाग व IQAC के संयुक्त तत्वावधान में “एडॉप्टेशन फ्रॉम टेक्स्ट टू स्क्रीन: नोवेल टू फिल्म” विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। मुख्य वक्ता प्रो. मधुशालिनी ने फिल्म को मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने का सशक्त माध्यम बताया। संगोष्ठी में फिल्म निर्माण, साहित्यिक कृतियों के रूपांतरण और कल्पना-संवेदना की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।

RDS College में संगोष्ठी का आयोजन

RDS College के स्नातकोतर अंग्रेजी विभाग व आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में “एडॉप्टेशन फ्रॉम टेक्स्ट टू स्क्रीन: नोवेल टू फिल्म” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो मधुशालिनी ने कहा कि फिल्म समाज का दर्पण और संवाद का सशक्त माध्यम है। यह मानवीय संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से जागृत करता है। फिल्म की प्रस्तुति में एक लिखित कहानी को दृश्य माध्यम में बदलने की प्रक्रिया को अपनाया जाता है।

 RDS College मुख्य वक्ता प्रो. मधुशालिनी ने फिल्म को मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने का सशक्त माध्यम बताया।

किसी उपन्यास या साहित्यिक कृति को सिनेमाई प्रस्तुति में रूपांतरित करने की जो कला है, इसको कई स्टेप्स में समझा जा सकता है। इस प्रक्रिया में कहानी की मूल भावना और पात्रों को पटकथा के माध्यम से जीवित किया जाता है। वहीं उपन्यास के पात्रों , कथानक और संवादों को फिल्म के लिए ढाला जाता है, जिससे कहानी बड़े पर्दे पर भावनात्मक रूप ले लेती है। इसके साथ ही कहानी के कथानक को समय और स्थान के आधार पर दृश्य में बांटा जाता है, ताकि दर्शक उसे समझ सके और अनुभव कर सकें।

RDS College

मुख्य वक्ता ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से फिल्म की प्रस्तुति के स्टेप्स को समझाया। इसमें पुरानी फिल्मों की संक्षिप्त प्रस्तुति भी की गई।
छात्रों ने मुख्य वक्ता से विषय वस्तु पर कई प्रश्न भी किये।

RDS College

मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो के के झा ने कहा कि फिल्म में कल्पना और संवेदना गहराई से जुड़े होते हैं। कल्पना कहानी और दृश्यों का निर्माण करती है, वहीं संवेदना दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है। फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ गहरी समझ पैदा करता है।

RDS College

अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए प्राचार्य डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि फिल्म निर्माण में कल्पना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कहानी और दृश्य तत्वों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वस्तुत फिल्म की कहानी अक्सर लेखक की कल्पना से जन्म लेती है, जो वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है।

संगोष्ठी में विषय प्रवेश डॉ नीलिमा झा, संचालन डॉ आरती कुमारी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनिता सिंह ने किया।
संगोष्ठी में डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ नीलिमा झा, डॉ अनिता सिंह, डॉ अमर ज्योति रंजन, डॉ एम एन रजवी, डॉ राजीव कुमार, डॉ सौरभ राज, डॉ चंद्र किशोर झा, डॉ आयशा जमाल, डॉ सुमन लता, डॉ अनुराधा पाठक, डॉ स्नेह लता,डॉ गणेश कुमार शर्मा, डॉ भगवान कुमार, धनंजय कुमार, डॉ ललित किशोर, डॉ विकास कुमार समेत छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

RELATED POSTS

View all

view all