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LS College में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस सम्पन्न, “शिक्षा में रामत्व” पर हुआ गहन विमर्श

LS College में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस सम्पन्न LS College में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस सम्पन्न
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Muzaffarpur 27 March : मुजफ्फरपुर के LS College में भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस पर “शिक्षा में रामत्व” विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें शिक्षा में संस्कार, चरित्र निर्माण और भारतीयता के महत्व पर विद्वानों ने अपने विचार रखे।

LS College में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस सम्पन्न

आज चैत्र शुक्ल नवमी शुक्रवार को LS College, मुजफ्फरपुर के मुख्य प्रशाल में भारतीय शिक्षण मंडल , उत्तर बिहार के तत्त्वावधान में भारतीय शिक्षण मंडल के 57 वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन हुआ जिसमें “शिक्षा में रामत्व” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि वस्तुत: राम का चरित्र ही शिक्षा का निदर्शन है। इसमें त्याग है , तप है , बलिदान है, करुणा है, प्रेम और सौहार्द है जो हमारे नैतिक मूल्यों का आधार ही नहीं बनाता, अपितु इसे प्रशस्त भी करता है।

LS College में भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस सम्पन्न
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भारतीय मनीषा में शिक्षा का अभिप्राय केवल हुनर सीखना और पैसा कमाना नहीं रहा है। शिक्षा का अर्थ जीवन को उत्तमोत्तम बनाने के अर्थ में रहा है। इस क्रम में उन्होंने रामायण में वर्णित अनेक प्रसंगों के साथ कई तरह के गुरुओं का एवं उनके कर्माकर्म का उदाहरण दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में महेश प्रसाद सिन्हा साइंस काँलेज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं संस्कृत के उद्भट विद्वान् डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि राम का चरित्र भारत का आदर्श चरित्र है। रामायण नर से नारायण बनने की प्रक्रिया है। केवल शिक्षा में नहीं, जन – जन में रामत्व की आवश्यकता है। नर से नारायण मनुष्य ही बनता है। राममय होना ही मनुष्य होने का प्रतीक है।

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विशिष्ट वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य देते हुए डॉ. अवधेश ठाकुर ने कहा कि राम के बिना भारतीय शिक्षा और संस्कृति की परिकल्पना असंभव है। ज्ञान के साथ चरित्र – निर्माण शिक्षा में रामत्व का रूप है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री अजीत कुमार ने कहा कि राम हमारे समाज के नायक हैं। शिक्षा में संस्कार और संस्कृति को जोड़ना ही रामत्व है।

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भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांत मंत्री डॉ. नवीन तिवारी ने कार्यक्रम का विषय – प्रवेश कराते हुए भारतीय शिक्षण मंडल के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य शिक्षा में भारतीयता को उपस्थापित करना है। इसी के आलोक में शैक्षिक अध्ययन, अध्यापन, अनुसंधान, प्रबोधन और प्रकाशन होना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन भारतीय शिक्षण मंडल उत्तर बिहार के व्यवस्था प्रमुख श्री विजय कुमार शर्मा ने किया और मंच संचालन डॉ. नवीन तिवारी ने किया।

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सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन आगत मुख्य वक्ता डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह, मुख्य अतिथि डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर, विशिष्ट अतिथि डॉ. अवधेश ठाकुर एवं भारतीय शिक्षण मंडल उत्तर बिहार के अध्यक्ष श्री अजीत कुमार द्वारा किया गया। इन सब को पुस्तक और शाल देकर सम्मानित किया गया।

मौके पर डॉ. ललित किशोर, डॉ. हरिशंकर भारती, कैप्टन बालेश्वर राय , डॉ. गणेश कुमार सिंह, डॉ. राकेश रंजन, डॉ. अमरेन्द्र झा , डॉ. रवि कुमार, डॉ पवन कुमार, डॉ मनोज कुमार, प्रशांत गौतम, प्रभात मिश्रा, मयंक मिश्रा, अभिनव राज , पुष्कर सिंह, कार्तिक पाण्डेय, अंशुमान, संतोष सिंह , दिव्य लता , अभियंता बलराम सिंह, अभियंता सुबोध कुमार, मनोज शुक्ला, रवींद्र प्रसाद सिंह, शिक्षक अनिल कुमार, सरोज कुमार, राकेश कुमार आदि के अलावा अनेक छात्र – छात्राओं , शिक्षकगण ,शिक्षकेतर कर्मचारीगण मौजूद थे।