Ajit Pawar : Ajit Pawar Viman Hadsa की AAIB रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। VT-SSK Learjet 45XR पूरी तरह तकनीकी रूप से फिट था, लेकिन 3 किमी विजिबिलिटी, टेबल-टॉप रनवे और कमजोर एयरफील्ड सुविधाएं इस दर्दनाक हादसे की बड़ी वजह बनीं।
Ajit Pawar Viman Hadsa
28 जनवरी 2026 को बारामती में हुआ VT-SSK Learjet 45XR हादसा भारतीय नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बनकर सामने आया। इस वीआईपी चार्टर विमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई। Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट साफ बताती है कि यह हादसा किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि खराब मौसम, गलत पायलट निर्णय और कमजोर एयरफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के संयुक्त असर से हुआ।
विमान पूरी तरह तकनीकी रूप से फिट था
AAIB की शुरुआती जांच में पाया गया कि Bombardier Learjet 45XR (VT-SSK) अच्छी तरह मेंटेन किया गया था। उड़ान से पहले किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी, deferred defect या सिस्टम failure दर्ज नहीं था।
विमान का टेक-ऑफ वेट, सेंटर ऑफ ग्रैविटी और फ्यूल लोड सभी अनुमत सीमा के भीतर थे। DFDR और मलबे की फॉरेंसिक जांच में इंजन पावर और कंट्रोल लिंक continuity भी सामान्य पाई गई। इसका मतलब साफ है कि विमान दुर्घटना के समय पूरी तरह उड़ान योग्य था।

अनुभवी क्रू, लेकिन निर्णय में हुई गंभीर चूक
कैप्टन सुमित कपूर के पास 18,855 घंटे का फ्लाइंग अनुभव था, जबकि फर्स्ट ऑफिसर संभवी पाठक के पास 2,490 घंटे का अनुभव था। दोनों के पास Learjet 45XR पर पर्याप्त घंटे थे।
यही अनुभव शायद “overconfidence trap” में बदल गया, जहां क्रू ने 5 किमी VFR न्यूनतम विजिबिलिटी के नियम के बावजूद 3 किमी विजिबिलिटी में भी लैंडिंग जारी रखने का फैसला लिया। यही इस हादसे की सबसे अहम मानवीय भूल मानी जा रही है।
बारामती एयरफील्ड की कमजोरियां हादसे को बढ़ाती गईं
बारामती का एयरफील्ड uncontrolled aerodrome है, जहां ILS जैसी आधुनिक navigation system उपलब्ध नहीं थी। रनवे 11 पर faded markings, wind-sock की कमी और fog के बीच runway reference कमजोर था।
सबसे बड़ा खतरा इसका table-top terrain था। रनवे ऊंचाई पर बना होने की वजह से नीचे का भूभाग पायलट को glide path के बारे में optical illusion देता है। fog और black-hole effect ने इस भ्रम को और बढ़ाया। इसी कारण विमान रनवे centerline से करीब 50 मीटर बाईं ओर drift कर गया।
अंतिम मिनटों में क्या हुआ?
मुंबई से उड़ान भरने के बाद विमान ने 08:31 बजे बारामती टावर से विजिबिलिटी पूछी, जहां 3 किमी visibility बताई गई। इसके बावजूद crew ने approach जारी रखा।
पहला landing attempt असफल रहा और go-around किया गया। दूसरी बार 08:43 बजे “field in sight” call के बाद Runway 11 के लिए clearance मिला।
CVR के अनुसार आखिरी सेकंड्स में crew को alignment error का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 08:46 बजे विमान रनवे से पहले निचले भूभाग से टकरा गया और उसमें भीषण आग लग गई।
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— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) February 23, 2026
Ajit Pawar Viman Hadsa मुख्य वजह: CFIT
AAIB ने इस दुर्घटना को Controlled Flight Into Terrain (CFIT) की श्रेणी में रखा है। इसका अर्थ है कि विमान पूरी तरह कंट्रोल में था, इंजन भी काम कर रहे थे, लेकिन पायलट terrain clearance का सही आकलन नहीं कर सके।
यहां तीन कारण सबसे अहम रहे:
- 3 किमी विजिबिलिटी में लैंडिंग का निर्णय
- table-top runway से optical illusion
- कमजोर runway markings और navigation support
इन तीनों ने मिलकर एक सुरक्षित विमान को हादसे में बदल दिया।
Ajit Pawar Viman Hadsa : DGCA के लिए बड़ा सबक
यह हादसा केवल एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि regional uncontrolled airfields की सुरक्षा कमियों का आईना है। AAIB ने DGCA को VIP और charter traffic वाले ऐसे airfields पर basic ILS, बेहतर runway markings, wind indicators और on-site fire response टीम अनिवार्य करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि crash के बाद स्थानीय fire services को बाहर से बुलाना पड़ा, जिससे rescue response में देरी हुई और नुकसान बढ़ा।
निष्कर्ष
VT-SSK Ajit Pawar Viman Hadsa यह बताता है कि aviation safety केवल aircraft reliability पर निर्भर नहीं करती। यदि पायलट decision-making, weather minimums और airfield infrastructure में एक साथ चूक हो जाए, तो अनुभवी crew और technically fit aircraft भी tragedy में बदल सकते हैं।
यह दुर्घटना भारत के regional aviation safety reforms के लिए एक turning point साबित हो सकती है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।