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LS College में आदि शंकराचार्य जयंती पूर्व संध्या पर संगोष्ठी, ‘एकात्मता’ को बताया आज की सबसे बड़ी जरूरत

LS College में आदि शंकराचार्य जयंती पूर्व संध्या पर संगोष्ठी LS College में आदि शंकराचार्य जयंती पूर्व संध्या पर संगोष्ठी
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Muzaffarpur 20 April : LS College में दर्शनशास्त्र व संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने आदि शंकराचार्य के ‘एकात्मता’ सिद्धांत को वर्तमान समय के लिए प्रासंगिक बताया, जबकि मुख्य वक्ता प्रो. अम्बिका दत्त शर्मा ने अद्वैत वेदांत को ‘स्वराज’ का वास्तविक दर्शन बताया।

LS College में आदि शंकराचार्य जयंती पूर्व संध्या पर संगोष्ठी

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LS College के दर्शनशास्त्र एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आदि शंकराचार्य जयंती की पूर्व संध्या पर ‘आचार्य शंकर: सार्वभौमिक एकात्मता का ब्रह्म घोष’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने आदि शंकराचार्य के दार्शनिक सिद्धांतों को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

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उन्होंने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि आचार्य शंकर के विचारों की प्रासंगिकता आज भी पूरी तरह अक्षुण्ण है और समाज में व्याप्त वैचारिक दूरियों को पाटने के लिए हम सभी को उनके ‘एकात्मता’ के मार्ग को अपनाने की जरूरत है। प्रो. कनुप्रिया ने दोहराया कि कॉलेज ऐसे बौद्धिक विमर्शों के माध्यम से छात्रों के बीच भारतीय मूल्यों और सार्वभौमिक एकता के संदेश को प्रसारित करने के लिए संकल्पित है।

LS College में आदि शंकराचार्य जयंती पूर्व संध्या पर संगोष्ठी
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संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अम्बिका दत्त शर्मा ने अद्वैत वेदांत को भारत में ‘स्वराज’ का असली दर्शन बताया। उन्होंने कहा कि आचार्य शंकर द्वारा चारों पीठों की स्थापना दरअसल ‘वेद राज्य’ की परिकल्पना को साकार करने का प्रतीक था। इससे पूर्व, कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संगीत विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत दीप प्रज्वलन एवं मधुर स्वागत गीत से हुआ, जिसके बाद दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने अतिथियों का औपचारिक अभिनंदन किया।

LS College में आदि शंकराचार्य जयंती पूर्व संध्या पर संगोष्ठी
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संचालन संस्कृत विभाग के डॉ. परमेश तिवारी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्र विभाग की डॉ दीपिका कुमारी ने किया। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. निखिल रंजन प्रकाश, प्रो. सरोज कुमार वर्मा, डॉ. पयौली, डॉ. रमेश विश्वकर्मा, डॉ. अनुराधा पाठक एवं डॉ. पूजा कुमारी ने भी अपने विचार रखे।

मौके पर प्रो. राजीव झा, प्रो. जयकांत सिंह, प्रो एसआर चतुर्वेदी, डॉ अर्धेंदु, डॉ अर्चना ठाकुर, डॉ त्रिपदा भारती, डॉ शशिकांत पाण्डेय, डॉ राजीव कुमार, डॉ राजेश अनुपम, डॉ आनंद कुमार सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।