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Muzaffarpur समेत नगर निकायों में 16 मीटर तक की इमारतों का नक्शा अब आर्किटेक्ट करेंगे पास,जल्द लागू होगी नई व्यवस्था

May 9, 2026 | by Goltoo

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मुजफ्फरपुर 9 May : Muzaffarpur समेत नगर निकायों में 16 मीटर तक की इमारतों का नक्शा अब आर्किटेक्ट पास करेंगे. बिहार सरकार भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा बिहार भवन उपविधि 2026 में संशोधन की तैयारी अंतिम चरण में है।

Muzaffarpur समेत नगर निकायों में नई व्यवस्था

नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर विकास विभाग से सूचीबद्ध आर्किटेक्ट अब 16 मीटर तक ऊंचे आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे स्वयं पास कर सकेंगे। इसका लाभ Muzaffarpur सहित राज्य के अन्य नगर निकायों में भी मिलेगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद छोटे और मध्यम आकार के भवन निर्माण के लिए लोगों को नगर निगम कार्यालय के लंबे चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर पांच से छह मंजिला भवनों के निर्माण की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो सकती है।

अभी क्या है व्यवस्था

वर्तमान में किसी भी भवन का नक्शा पास कराने के लिए आर्किटेक्ट द्वारा तैयार नक्शे को ऑनलाइन आवेदन और जरूरी दस्तावेजों के साथ नगर निगम को भेजा जाता है। इसके बाद निगम के इंजीनियर उसकी तकनीकी जांच करते हैं। सभी मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही नक्शा स्वीकृत किया जाता है।

Muzaffarpur समेत नगर निकायों में नई व्यवस्था
Muzaffarpur समेत नगर निकायों में नई व्यवस्था

हालांकि शहर के कई आर्किटेक्टों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में नक्शा पास कराने में एक से दो साल तक का समय लग जाता है। नगर क्षेत्रों के विस्तार और बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण निगम पर कार्यभार लगातार बढ़ा है।

नई व्यवस्था में क्या बदलेगा

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार सूचीबद्ध आर्किटेक्टों को 16 मीटर तक ऊंची इमारतों के नक्शे स्वीकृत करने का अधिकार मिल सकता है। नगर निगम केवल निगरानी और सुपरविजन की भूमिका में रहेगा। यदि किसी भवन निर्माण में नियमों की अनदेखी या गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित आर्किटेक्ट का लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा।

सीनियर आर्किटेक्ट और स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति के सदस्य विपुल कुमार सिंह का कहना है कि नई व्यवस्था से निर्माण प्रक्रिया में तेजी आएगी और लोगों को अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। उनके अनुसार इससे नगर निगम पर बढ़ता दबाव भी कम होगा।

लेकिन उठ रहे हैं कई सवाल

नई व्यवस्था को लेकर शहर में कई सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अभी भी 10 से 14 फीट चौड़ी सड़कों पर जी+3 और उससे ऊंची इमारतें बन रही हैं, जबकि वहां फायर फाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में अगर नक्शा पास करने की जिम्मेदारी सीधे आर्किटेक्ट को दी जाती है, तो सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन करेगा?

इसके अलावा भवनों के बीच पर्याप्त दूरी, हवा और आपातकालीन निकास की व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। नागरिकों का कहना है कि कई बार नक्शा स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य नियमों के विपरीत होता है, लेकिन जांच और कार्रवाई नहीं हो पाती।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि 15 जुलाई 2009 को लागू प्रावधानों के तहत सूचीबद्ध आर्किटेक्टों को विभिन्न प्रकार के भवनों के नक्शे पास करने का अधिकार दिया गया था। बाद में कई मामलों में अनियमितता सामने आने पर वर्ष 2010 में मुजफ्फरपुर में 13 से अधिक आर्किटेक्टों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।

नई उपविधि की प्रमुख बातें

  • 16 मीटर तक ऊंचे आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे सूचीबद्ध आर्किटेक्ट पास कर सकेंगे।
  • 30 फीट चौड़ी सड़क पर ग्राउंड सहित छह मंजिला इमारत बनाने की अनुमति मिल सकती है।
  • 25 फीट चौड़ी सड़क पर चार मंजिल या 16 मीटर तक निर्माण संभव होगा।
  • व्यावसायिक भवनों में भूखंड के 60 से 70 प्रतिशत हिस्से का उपयोग निर्माण के लिए किया जा सकेगा, जबकि अभी यह सीमा 40 प्रतिशत है।
  • फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 3 से बढ़ाकर 5.5 से 6 तक करने का प्रस्ताव है। इससे छोटे भूखंडों पर भी ऊंची इमारतें बन सकेंगी।
  • 19 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली बहुमंजिला इमारतों के लिए ग्राउंड कवरेज 40 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन निर्माण क्षेत्र में तेजी आएगी, लेकिन इसके साथ सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी होगा।

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