LS College Muzaffarpur: 127वें स्थापना दिवस पर जानिए 1899 से शुरू हुई गौरवशाली विरासत और शिक्षा का स्वर्णिम इतिहास
July 2, 2026 | by Goltoo
Muzaffarpur 3 July : LS College Muzaffarpur मना रहा 127वाँ स्थापना दिवस। जानिए 1899 से शुरू हुई इस ऐतिहासिक संस्थान की गौरवशाली विरासत, महान विभूतियों से जुड़ा इतिहास और शिक्षा में योगदान।
LS College Muzaffarpur: 127वें स्थापना दिवस
उत्तर बिहार की उच्च शिक्षा का गौरव और ऐतिहासिक धरोहर लंगट सिंह महाविद्यालय (LS College), मुजफ्फरपुर 3rd July अपना 127वाँ स्थापना दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मना रहा है। वर्ष 1899 में दूरदर्शी समाजसेवी बाबू लंगट सिंह द्वारा स्थापित यह संस्थान एक सदी से भी अधिक समय से शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक चेतना का केंद्र बना हुआ है। 127 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा ने एल.एस. कॉलेज को न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार की शैक्षणिक पहचान बना दिया है।
इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर कॉलेज परिसर को आकर्षक रोशनी और रंग-बिरंगी सजावट से सुसज्जित किया गया है। शाम होते ही पूरा परिसर दूधिया रोशनी से जगमगा उठा, जिसने पूर्व छात्रों, विद्यार्थियों और शहरवासियों को अपनी ओर आकर्षित किया। स्थापना दिवस को लेकर कॉलेज प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर होगी विशेष संगोष्ठी
स्थापना दिवस के मुख्य आयोजन के तहत LS College के ऐतिहासिक आचार्य जे.बी. कृपलानी सभागार में एक भव्य समारोह एवं विशेष राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इस वर्ष संगोष्ठी का विषय “बिहार में शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास को गति प्रदान करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भूमिका” रखा गया है, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।
समारोह की अध्यक्षता बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय करेंगे। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में बिहार सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल उपस्थित रहेंगे, जबकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. समीर कुमार शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे।
LS College : 127 वर्षों से ज्ञान और राष्ट्रनिर्माण का केंद्र
उत्तर बिहार में आधुनिक उच्च शिक्षा की मजबूत नींव रखने वाले इस संस्थान ने वर्षों के दौरान लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की है। यहां से निकले विद्यार्थियों ने प्रशासन, न्यायपालिका, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, राजनीति और समाज सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
एल.एस. कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रनिर्माण की विचारधारा का भी प्रमुख केंद्र रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी इस परिसर ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महान विभूतियों से जुड़ा रहा है गौरवशाली इतिहास
LS College का इतिहास देश की अनेक महान विभूतियों से जुड़ा रहा है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का इस संस्थान से ऐतिहासिक संबंध रहा है। इन महान हस्तियों की उपस्थिति और विचारों ने कॉलेज की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध बनाया।
आचार्य जे.बी. कृपलानी, जिन्होंने वर्ष 1912 से 1917 तक लंगट सिंह कॉलेज में अंग्रेज़ी एवं इतिहास का अध्यापन किया और बाद में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता तथा 1947 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने, उनकी स्मृति में कॉलेज के मुख्य सभागार का नाम ‘आचार्य जे.बी. कृपलानी सभागार’ रखा गया है।
शैक्षणिक धरोहर और ऐतिहासिक परिसर
कॉलेज की पहचान केवल उत्कृष्ट शिक्षा तक सीमित नहीं है। इसका भव्य ऐतिहासिक परिसर, आकर्षक वास्तुकला, समृद्ध पुस्तकालय, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं तथा ऐतिहासिक वेधशाला (ऑब्जर्वेटरी) इसे बिहार की सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक धरोहरों में शामिल करती हैं। शिक्षा के साथ-साथ यह परिसर वर्षों से साहित्यिक, सांस्कृतिक और अनुसंधान गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र रहा है।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप आगे बढ़ रहा संस्थान
वर्तमान में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से संबद्ध यह प्रमुख अंगीभूत महाविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020), अनुसंधान, डिजिटल शिक्षा, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। आधुनिक संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ संस्थान अपनी ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।
प्राचार्या प्रो. कनुप्रिया का संदेश
कॉलेज की प्राचार्या प्रो. कनुप्रिया ने स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि “लंगट सिंह महाविद्यालय का 127 वर्षों का इतिहास बिहार और देश के शैक्षणिक एवं सामाजिक पुनर्निर्माण का साक्षी रहा है। स्थापना दिवस हमारे लिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन, उपलब्धियों के मूल्यांकन और भविष्य के संकल्पों का अवसर भी है।”
उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में बिहार के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास पर गंभीर विमर्श किया जाएगा। पिछले एक वर्ष में कॉलेज ने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार तथा छात्र सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। भविष्य में भी संस्थान उत्कृष्ट शिक्षा और आधुनिक संसाधनों के साथ अपनी गौरवशाली विरासत को सुरक्षित रखते हुए नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) June 29, 2026
पूर्व छात्रों और शहरवासियों में उत्साह
127वें स्थापना दिवस को लेकर पूर्व छात्रों, शिक्षकों, वर्तमान विद्यार्थियों और शहरवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अनेक पूर्व छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए एल.एस. कॉलेज को उत्तर बिहार की शैक्षणिक पहचान और गौरव का प्रतीक बताया। कॉलेज प्रशासन ने सभी पूर्व छात्रों और शुभचिंतकों को समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया है।
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Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।
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