Muzaffarpur News
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Muzaffarpur 17 July : मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक LS College के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के तत्वावधान में आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ के गौरवशाली 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

LS College में ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

‘रश्मिरथी: आधुनिक संदर्भ में’ विषय पर केंद्रित इस बौद्धिक महाकुंभ का आयोजन कॉलेज के कृपलानी सभागार’ में हुआ, जिसमें देश के प्रख्यात साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्या प्रो. कनुप्रिया ने कहा कि LS College केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय चेतना और राष्ट्रकवि दिनकर की साहित्यिक साधना का साक्षात तीर्थस्थल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ वर्ष 1950 से मार्च 1952 तक लंगट सिंह महाविद्यालय में ही हिन्दी विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उनकी इस अमर काव्य-कृति ‘रश्मिरथी’ का सृजन और संपूर्ण वैचारिक ताना-बाना इसी महाविद्यालय परिसर में अध्यापन कार्य के दौरान ही बुना गया था, जो इस संस्थान के गौरव को और अधिक बढ़ा देता है।

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LS College में 'रश्मिरथी' के 75 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
LS College में ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
LS College में 'रश्मिरथी' के 75 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
LS College में ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

रश्मिरथी केवल महाभारत के एक उपेक्षित पात्र की कथा नहीं है, बल्कि यह हर युग के उस शोषित, वंचित और अपनी योग्यता के दम पर समाज में स्थान खोजने वाले व्यक्ति का महाघोष है। प्रो कनुप्रिया ने आगे कहा कि यह आयोजन केवल इतिहास को याद करना नहीं है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी में राष्ट्रवाद, स्वाभिमान और साहित्यिक चेतना की नई ऊर्जा का संचार करना है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित प्रख्यात कवि और साहित्यकार डॉ. संजय पंकज ने कहा कि रश्मिरथी केवल शब्दों का संकलन नहीं, वरन यह दिनकर के हृदय की धधकती हुई ज्वाला है जो सत्तर वर्षों से अधिक समय से सुलगते मानवीय प्रश्नों को प्रकाशित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह महज एक कविता नहीं, बल्कि मनुष्य की आत्मा का आत्मसंवाद है।

दिनकर स्मृति न्यास, पटना के सचिव श्री अरविन्द कुमार सिंह ने अपने संबोधन में ‘रश्मिरथी’ के सुप्रसिद्ध तृतीय सर्ग का ओजपूर्ण पाठ किया तथा कहा कि दिनकर जी की लेखनी में जो अंगारे थे, वे समाज की कुरीतियों को भस्म करने और न्याय की स्थापना के लिए थे। 

संगोष्ठी की समन्वयक व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राधा कुमारी ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार प्रकट करते हुए कहा कि दिनकर जी की विरासत को सहेजना और नई पीढ़ी तक उनके विचारों को पहुँचाना हिन्दी विभाग का परम कर्तव्य है। संगोष्ठी में प्रो एसआर चतुर्वेदी, प्रो पुष्पा कुमारी, डॉ शशिकांत पाण्डेय, डॉ रीमा कुमारी, डॉ वेदप्रकाश दुबे, डॉ नवीन कुमार, डॉ सुधांशु, डॉ आनंद कुमार सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।

Goltoo

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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