Muzaffarpur 7 September : Muzaffarpur के मालीघाट में आयोजित ‘कला संवाद’ में वरिष्ठ रंगकर्मी एवं शिक्षक सुधीर कुमार और मुकेश कुमार मालाकार को कला, रंगमंच व सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
Muzaffarpur में वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर कुमार सम्मानित
शहर के मालीघाट में सोमवार को सरला श्रीवास्तव सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से ‘कला संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कठपुतली कलाकार कांता देवी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में कला, संस्कृति, रंगमंच और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान कला एवं रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ रंगकर्मी और शिक्षक सुधीर कुमार तथा शिक्षक मुकेश कुमार मालाकार को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कांता देवी ने कहा कि कला समाज के विचारों और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कठपुतली कला को लोक एवं पारंपरिक संस्कृति की महत्वपूर्ण विरासत बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से लंबे समय से सामाजिक संदेश लोगों तक पहुंचाए जाते रहे हैं। डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच कठपुतली जैसी पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने और आधुनिक माध्यमों के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने कहा कि कला की सार्थकता तभी है, जब उसका उद्देश्य समाज को बेहतर दिशा देना हो। उन्होंने कहा कि सरला श्रीवास ने कठपुतली कला के माध्यम से सामाजिक एकता, जागरूकता, अहिंसा और शांति का संदेश लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया।
चार दशकों से रंगमंच से जुड़े हैं सुधीर कुमार
कार्यक्रम में कठपुतली कलाकार एवं फाउंडेशन के सचिव सुनील कुमार ने वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर कुमार के लंबे रंगमंचीय सफर की चर्चा की। उन्होंने बताया कि सरकारी शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ सुधीर कुमार करीब चार दशकों से रंगमंच और कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे ‘शिक्षा में नाटक कला’ (Drama Art in Education) से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल में मास्टर ट्रेनर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
बीपीएससी 1999 बैच के सहायक प्रशिक्षित शिक्षक सुधीर कुमार वर्तमान में मध्य विद्यालय चकिया, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर के प्रधानाध्यापक हैं। नाटक, कहानी और पटकथा लेखन के साथ उन्होंने लघु फिल्म, टेली-फिल्म, नाटक और डॉक्यूमेंट्री के निर्माण एवं निर्देशन में भी योगदान दिया है। वे संरचना आर्ट थिएटर (SAT) के संस्थापक सचिव हैं, जिसकी स्थापना 27 मार्च 1987 को हुई थी। इसके अलावा मंच संचालन और इवेंट मैनेजमेंट के साथ सामाजिक संस्थाओं से भी उनका जुड़ाव रहा है।
साहित्य और सामाजिक सेवा में भी योगदान
सुधीर कुमार का योगदान केवल रंगमंच तक सीमित नहीं रहा है। गरीब बच्चों के लिए नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा केंद्र चलाने के साथ वे पुस्तक प्रकाशन से भी जुड़े रहे हैं। वर्ष 2010 में उनका हिंदी नाटक संग्रह ‘रामलीला’ प्रकाशित हुआ। इसके अलावा ‘आदमियत महंगी है’ नामक नाटक संग्रह भी उनके साहित्यिक एवं रंगमंचीय कार्यों का हिस्सा है।
Muzaffarpur में विश्व प्रसिद्ध कुतबी ब्रदर्स की सूफियाना कव्वाली ने बांधा समां https://t.co/nI2fYll02o #Muzaffarpur #news pic.twitter.com/2cPUqx29Bl
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) September 6, 2026
आयोजकों के अनुसार रंगमंच और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए सुधीर कुमार को जिला स्तर पर 300 से अधिक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया गया है। बिहार सरकार, जिला प्रशासन मुजफ्फरपुर और शिक्षा विभाग की ओर से भी विभिन्न अवसरों पर उनके योगदान को सम्मान मिला है।
इस अवसर पर सुनील कुमार ने सुधीर कुमार और मुकेश कुमार मालाकार के दीर्घ एवं समर्पित योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सक्रिय और रचनात्मक जीवन की कामना की। दोनों को ‘लीचिया लाले लाल’ पुस्तक और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अमन चिल्ड्रेन स्कूल की प्राचार्य बबिता ठाकुर ने किया।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

Comments are closed.