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Patna 18 May : Bihar Football का भविष्य इन दिनों मैदान पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक विवादों के बीच उलझता नजर आ रहा है। Bihar Football एसोसिएशन (BFA) के भीतर उभरे प्रशासनिक मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। आरोप है कि संगठन के नियमों और अधिकारों को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच टकराव इतना बढ़ गया है कि इसका असर राज्य के फुटबॉल ढांचे और जिला इकाइयों तक पहुंच सकता है।

Bihar Football एसोसिएशन में अवैध बैठक, पदों के दावे और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर टकराव तेज

विवाद की शुरुआत 24 मई 2026 को प्रस्तावित एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EOGM) को लेकर हुई है। Bihar Football एसोसिएशन के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बैठक को पूरी तरह अवैध बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि बैठक बुलाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई गई और बैठक की जगह तक स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं की गई। संगठन के अनुसार, किसी भी आधिकारिक बैठक या निर्णय के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

Bihar Football में बढ़ा विवाद: संगठन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप से गहराया प्रशासनिक संकट
Bihar Football में बढ़ा विवाद: संगठन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप से गहराया प्रशासनिक संकट

मामला तब और गंभीर हो गया जब कुछ पत्राचार में एक पदाधिकारी द्वारा खुद को उपाध्यक्ष के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर सवाल उठे। बिहार फुटबॉल एसोसिएशन का दावा है कि संबंधित व्यक्ति कभी भी संगठन में उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित नहीं हुए। एसोसिएशन का कहना है कि बिना अधिकार या चुनावी मान्यता के किसी पद का उपयोग करना संगठनात्मक भ्रम और विवाद को जन्म दे सकता है।

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इसके अलावा संगठन के पंजीकृत कार्यालय के पते को लेकर भी विवाद सामने आया है। बिहार फुटबॉल एसोसिएशन का आधिकारिक कार्यालय पटना स्थित बताया गया है, जबकि कुछ दस्तावेजों में मोतिहारी के पते का उल्लेख होने पर केंद्रीय नेतृत्व ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता मानते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।

17 मई को हुई एक बैठक के बाद Bihar Football एसोसिएशन ने जिला फुटबॉल इकाइयों को चेतावनी भी जारी की है। संगठन ने संकेत दिया है कि यदि कोई जिला इकाई कथित तौर पर गैर-अधिकृत गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय या कार्रवाई की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक संघर्ष का सीधा असर खिलाड़ियों, स्थानीय प्रतियोगिताओं और Bihar Football राज्य में फुटबॉल विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। बिहार में फुटबॉल पहले ही संसाधनों और अवसरों की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में संगठन के भीतर बढ़ता विवाद खेल के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह विवाद बातचीत और नियमों के तहत सुलझता है या फिर बिहार फुटबॉल में प्रशासनिक विभाजन और गहरा होता है। फिलहाल खिलाड़ी और जिला इकाइयां स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं।

Goltoo

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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