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छठ गीतों से मशहूर बिहार की लोकगायिका Sharda Sinha का निधन

Sharda Sinha
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New Delhi 5 November : छठ गीतों से पहचान बनाने वाली बिहार की सुप्रसिद्ध लोकगायिका Sharda Sinha का मंगलवार शाम दिल्ली एम्स में निधन हो गया। लम्बे समय से बीमार थी और 72 साल की उम्र में अंतिम सांसे ली.पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित शारदा सिन्हा पिछले 24 घंटों से वेंटिलेटर पर थीं और जिंदगी की जंग हार गईं। छठ महापर्व के पहले दिन उनकी मृत्यु ने बिहार समेत पूरे देश को शोक में डाल दिया है।

बिहार की लोकगायिका Sharda Sinha

Sharda Sinha का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले के हुलास गांव में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1974 में भोजपुरी गीतों से की थी और 1978 में उनका लोकप्रिय छठ गीत “उगहो हो सूरज देव” आया, जिसने उन्हें आम लोगों के दिलों तक पहुंचाया। इसके बाद 1989 में बॉलीवुड में “कहा तोहसे सजना” गाकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई।

बिहार की लोकगायिका Sharda Sinha
बिहार की लोकगायिका Sharda Sinha

शारदा सिन्हा ने संगीत में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए और साथ ही समस्तीपुर कॉलेज में प्राध्यापक के रूप में भी कार्य किया। उनके बेटे अंशुमन ने सोमवार को यूट्यूब पर लाइव आकर लोगों से अपनी मां के लिए प्रार्थना करने की अपील की थी। उन्होंने भावुक होकर कहा था, “मेरी मां वेंटिलेटर पर हैं और उन्हें आपकी दुआओं की जरूरत है। कृपया उनके लिए प्रार्थना जारी रखें।”

छठ महापर्व को सुरीले गीतों से सजाने वाली, बिहार को कला के क्षेत्र में नई पहचान देने वाली शारदा सिन्हा जी के स्वर अब शांत हो गए।

कल शाम से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, तबीयत बिगड़ने के बाद 26 अक्टूबर को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था। शारदा सिन्हा को दिल्ली AIIMS में भर्ती कराया गया था. 4 नवंबर को तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. कैंसर से जूझ रहीं सिंगर ने 72 साल की उम्र में ली अंतिम सांस।

 Sharda Sinha  को 2018 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।
Sharda Sinha को 2018 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। X-Image

बिहार स्वर कोकिला शारदा सिन्हा को 1991 में पद्मश्री, 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2006 में अहिल्या देवी अवार्ड, 2015 में बिहार सरकार का पुरस्कार और 2018 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। इस वर्ष उनके पति का भी निधन हुआ था, जिससे उनका परिवार पहले से ही शोक में था।

शारदा सिन्हा के छठ गीत सदैव छठ पर्व की परंपरा का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे। उनके द्वारा गाए गए छठ गीत आज भी हर घर में गूंजते हैं और उनकी मखमली आवाज हमेशा उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेगी। उनके निधन से लोक संगीत और बिहार की लोक संस्कृति को एक बड़ी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल है।

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