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BRABU 37 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य की पोस्टिंग पर बढ़ी चिंता, कई प्रोफेसरों ने योगदान देने से किया इनकार

May 14, 2026 | by Goltoo

payolijee

Muzaffarpur 14 May : BRABU के 37 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य की पोस्टिंग के बाद कई प्रोफेसरों ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। भवन, स्टाफ और संसाधनों की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं नए प्राचार्य इसे शिक्षा विस्तार की सकारात्मक पहल बता रहे हैं।

BRABU 37 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य की पोस्टिंग पर बढ़ी चिंता

BRABU द्वारा 37 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य की पोस्टिंग किए जाने के बाद कई तरह की समस्याएं और चर्चाएं सामने आने लगी हैं। बुधवार को कई प्रोफेसरों ने नए कॉलेजों में प्राचार्य पद पर योगदान देने से इनकार कर दिया।

इन शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार office में आवेदन देकर प्राचार्य पद पर की गई पोस्टिंग को रद्द करने की मांग की है। कई वरिष्ठ प्रोफेसरों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस जिम्मेदारी से अपना नाम हटाने की अपील की है।

BRABU प्रशासन ने मंगलवार को नए खुलने वाले 37 डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य प्रभारी की नियुक्ति की थी। इनमें वरिष्ठ स्केल के प्रोफेसर और सहायक प्राध्यापक भी शामिल हैं। कुछ शिक्षकों ने इस पूरी प्रक्रिया को नियमों के विरुद्ध बताते हुए राजभवन को ईमेल के जरिए शिकायत भी भेजी है। हालांकि कुछ प्राचार्य प्रभारी ने अपने नए कॉलेजों में योगदान भी दे दिया है।

BRABU 37 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य की पोस्टिंग पर बढ़ी चिंता
BRABU 37 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य की पोस्टिंग पर बढ़ी चिंता

जानकारी के अनुसार सरकार का सख्त निर्देश है कि इन नए कॉलेजों में 1 जुलाई से कक्षाएं शुरू हो जानी चाहिए। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश कॉलेजों के पास अपना भवन ही नहीं है। शुरुआती दौर में ये कॉलेज प्लस-टू स्कूलों की इमारतों पर निर्भर रहेंगे। ऐसे में कई जगह बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आधारभूत सुविधाएं ही पूरी नहीं हैं तो कक्षाएं और कार्यालय का कामकाज कैसे चलेगा।

शिक्षकों का कहना है कि नए कॉलेजों को शुरू करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। केवल प्राचार्य नियुक्त कर देने से व्यवस्था पूरी नहीं हो जाएगी। कॉलेजों में प्रोफेसर, नॉन-टीचिंग स्टाफ, तृतीय और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की जरूरत होगी, लेकिन सरकारी स्तर पर लंबे समय से बहाली नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि अंगीभूत कॉलेजों और BRABU में वर्ष 1995 के बाद से नियमित नियुक्तियां नहीं हुई हैं। ऐसे में यदि पुराने कॉलेजों से शिक्षक और कर्मचारी हटाकर नए कॉलेजों में भेजे जाएंगे तो पुराने कॉलेजों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

BRABU प्रशासन पहले ही संकेत दे चुका है कि कई जगह आउटसोर्सिंग के जरिए स्टाफ रखा जाएगा। हालांकि इस व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की नियुक्ति होने पर बाहरी एजेंसियों की मनमानी बढ़ सकती है। साथ ही कर्मचारियों का लगातार आना-जाना कार्य व्यवस्था को प्रभावित करेगा।

कई वरिष्ठ प्रोफेसरों का मानना है कि 37 नए ब्लॉक स्तरीय डिग्री कॉलेजों को एक साथ शुरू करना आसान नहीं है। कई प्राचार्य प्रभारी ऐसे हैं जो अगले एक-दो वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में उन पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी डालना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

इसी बीच नए प्रभारी प्राचार्या प्रभारी Dr. Payoli ने सकारात्मक सोच के साथ इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि “सब लोग सकारात्मक रहकर कार्य करेंगे तो लक्ष्य जरूर पूरा होगा। सरकार की यह शुरुआत अच्छी है। थोड़ा समय जरूर लगेगा, लेकिन शिक्षक होने के नाते अंधकार में दीप जलाने का काम हमें ही करना है।”

डॉ. पायोली ने कहा कि इन नए कॉलेजों का सबसे अधिक लाभ गांव की उन लड़कियों को मिलेगा जो दूरी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती थीं। उन्होंने कहा कि कई छात्र-छात्राएं कॉलेजों में नामांकन तो ले लेते थे, लेकिन दूर होने की वजह से नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते थे। नए कॉलेज खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जिस गति से कार्य कर रही है और कुलपति महोदय जिस दृढ़ता के साथ इस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, उससे आने वाले समय में अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार को इन व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि नए कॉलेजों की शुरुआत बेहतर तरीके से हो सके और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

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