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BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध, एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित

BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध, एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध, एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित
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Muzaffarpur/Varanasi 1 April : BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में शोध दल ने प्लांट-बेस्ड मिल्क के पोषण, स्वास्थ्य लाभ और प्रसंस्करण पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अध्ययन किया। यह शोध एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित हुआ, जो भारत में डेयरी विकल्पों और ग्रामीण उद्यमिता के लिए नई दिशा दिखाता है।

BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai

प्रख्यात खाद्य वैज्ञानिक, बीएचयू के वरिष्ठ प्रोफेसर और वर्तमान में बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय शोध दल ने प्रतिष्ठित एल्सेवियर जर्नल ‘फूड न्यूट्रिशन’ में एक महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रकाशित किया है। यह शोध पत्र प्लांट-बेस्ड मिल्क के प्रसंस्करण, पोषण प्रोफाइल और स्वास्थ्य प्रभावों पर केंद्रित है, जो भारत के बदलते आहार परिदृश्य में एक स्थायी समाधान के रूप में उभर रहा है।

BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध
BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध

यह अध्ययन देश भर के विशेषज्ञों के बीच सहयोग पर आधारित है। रिसर्च टीम में अशोक कुमार यादव और नानम रोन्जा राजीव गांधी विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश से, अमन राठौर और हिमांशु त्रिवेदी स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से हैं। प्रो. राय और विकास पटेल डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हैं।

BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध, एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित
BRABU VC Prof Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में प्लांट-बेस्ड मिल्क पर ऐतिहासिक शोध, एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित

शोध के प्रभाव पर चर्चा करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा: हमारा यह व्यापक शोध ओट्स, बादाम, सोया और नारियल से प्राप्त दूध के विकल्पों का पारंपरिक गाय के दूध के साथ तुलनात्मक मूल्यांकन करता है। हालांकि इन विकल्पों में प्रोटीन की मात्रा भिन्न हो सकती है, लेकिन ये फाइबर और फाइटोस्टेरॉल, आइसोफ्लेवोन्स एवं ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे आवश्यक बायोएक्टिव यौगिकों से भरपूर हैं, जो हृदय की सुरक्षा और एंटीऑक्सीडेंट लाभ प्रदान करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि एंजाइमेटिक हाइड्रोलिसिस और रणनीतिक सुदृढ़ीकरण जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से खाद्य निर्माता भारत की बड़ी लैक्टोज-इंटोलरेंट आबादी के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट उत्पाद विकसित कर सकते हैं।

प्रो. राय ने इसके व्यापक विजन पर जोर देते हुए कहा: “स्वास्थ्य के साथ-साथ यह शोध डेयरी क्षेत्र के विविधीकरण के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को भी रेखांकित करता है। बिहार जैसे राज्य बाजरा (मिलेट्स) और मक्का जैसी स्थानीय फसलों का उपयोग करके ग्रामीण उद्यमिता और कृषि मूल्यवर्धन को बढ़ावा दे सकते हैं। ये विकल्प केवल प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि पूरक समाधान हैं जो पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करते हैं।”

प्रो. राय के पिछले दो वर्षों में विश्व के अग्रणी पत्रिकाओं में उनका 30वां अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध पत्र है। उनकी इस शोध सफलता पर अकादमिक जगत और पूर्व छात्र संगठनों ने हर्ष व्यक्त किया है।