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BRABU के कुलपति Prof. Dinesh Chandra Rai की अंतरराष्ट्रीय शोध उपलब्धि, पपीते के पत्तों से विकसित विशेष गुड़ को मिली वैश्विक पहचान

June 29, 2026 | by Goltoo

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Muzaffarpur 29 June : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति Prof. Dinesh Chandra Rai के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने पपीते के पत्तों से समृद्ध विशेष वैल्यू-एडेड गुड़ विकसित किया है। इस शोध को एल्सेवियर के प्रतिष्ठित LWT – Food Science and Technology जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में गुड़ में पहली बार कैंसर, डायबिटीज, सूजन और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़े 22 बायो-एक्टिव तत्वों की पहचान हुई है।

BRABU के कुलपति Prof. Dinesh Chandra Rai की अंतरराष्ट्रीय शोध उपलब्धि

वैश्विक फंक्शनल फूड सेक्टर में भारतीय वैज्ञानिकों को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान टीम ने पपीते के पत्तों के पाउडर से समृद्ध एक विशेष वैल्यू-एडेड गुड़ विकसित किया है। इस शोध को नीदरलैंड्स के प्रतिष्ठित एल्सेवियर ग्रुप के उच्च इम्पैक्ट फैक्टर (आईएफ 7.1) अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नल एलडब्लूटी – फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने अपने नवीनतम अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

BRABU के कुलपति Prof. Dinesh Chandra Rai की अंतरराष्ट्रीय शोध उपलब्धि, पपीते के पत्तों से विकसित विशेष गुड़ को मिली वैश्विक पहचान
BRABU के कुलपति Prof. Dinesh Chandra Rai की अंतरराष्ट्रीय शोध उपलब्धि, पपीते के पत्तों से विकसित विशेष गुड़ को मिली वैश्विक पहचान

कुलपति Prof. Dinesh Chandra Rai ने इस रिसर्च सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि पारंपरिक भारतीय खान-पान और आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के जरिए वैश्विक मंच पर स्थापित करना उनकी टीम का मुख्य लक्ष्य रहा है। इस हाई-लेवल अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम में बीएचयू के गौरव प्रताप सिंह, डॉ. अभिषेक दत्त त्रिपाठी, उर्वशी विक्रांता, अपर्णा अग्रवाल, विवेक कुमार मौर्य के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक दीपेंद्र कुमार महतो और सऊदी अरब के किंग सऊद यूनिवर्सिटी के डॉ. जावेद मसूद खान शामिल रहे।

गुड़ में पहली बार मिले कैंसर व शुगर से लड़ने वाले 22 तत्व

जानकारी देते हुए कुलपति प्रो राय ने बताया कि वैज्ञानिक जांच के लिए रिसर्च टीम ने आधुनिकतम पहाई रेजोल्यूशन एक्यूरेट मास स्पेक्ट्रोमेट्री और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस जैसी जटिल तकनीकों का सहारा लिया। जांच में इस विशेष गुड़ के भीतर पपीते के पत्तों से प्राप्त 22 ऐसे दुर्लभ बायो-एक्टिव यौगिकों (जैसे क्वेरसेटिन, कैटेचिन और फेरुलिक एसिड) की पुष्टि हुई है, जो इससे पहले कभी गुड़ में नहीं पाए गए। ये तत्व शरीर में इंसुलिन बढ़ाने (एंटी-डायबिटिक), सूजन कम करने (एंटी-इंफ्लेमेटरी), बीपी नियंत्रित करने और कैंसर कोशिकाओं को रोकने में बेहद असरदार माने जाते हैं।

अनुसंधान के दौरान विभिन्न मिश्रणों का परीक्षण किया गया, जिसमें प्रति किलोग्राम गुड़ में 40 ग्राम पपीते के पत्तों के पाउडर का फॉर्मूला स्वाद, सुगंध और औषधीय गुणों के मामले में सबसे अचूक और सर्वोत्तम पाया गया।

कुलपति प्रो. राय ने बताया कि यह शोध देश में लोकल टू ग्लोबल दृष्टिकोण के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा, यह उत्पाद न केवल सेहत के प्रति सजग उपभोक्ताओं को चीनी का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प देगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेकार समझे जाने वाले कृषि संसाधनों (जैसे पपीते के पत्ते) को एक नया बाजार मूल्य देकर किसानों की आमदनी को दोगुना करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

कुलपति प्रो. डी.सी. राय के इस उत्कृष्ट शोध और प्रेरणादायी अकादमिक और शोध नेतृत्व पर दोनों विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक समुदायों और एलुमनी एसोसिएशनों ने गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।

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