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Dr Shanti Suman सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन की जन्मजयंती पर वेबिनार का आयोजन

Dr Shanti Suman Dr Shanti Suman सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन की जन्मजयंती पर वेबिनार का आयोजन
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Muzaffarpur 18 September : हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन Dr Shanti Suman की जन्मजयंती पर थिंक बिहार रिसर्च फाउंडेशन के तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन किया। इसमें देशभर के 100 से अधिक साहित्यप्रेमी जुड़े रहे। वेबिनार में जिले के प्राध्यापक व साहित्यकारों ने कवयित्री शांति सुमन की रचनाओं पर चर्चा की। साहित्यकारों ने बिहार की पृष्ठभूमि पर लिखित शांति सुमन की रचनाओं पर गंभीरता से प्रकाश डाला।

Dr Shanti Suman सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन

Dr Shanti Suman  सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन की जन्मजयंती पर वेबिनार का आयोजन
Dr Shanti Suman सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन की जन्मजयंती पर वेबिनार का आयोजन


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लंगट सिंह कॉलेज के सहायक आचार्य सह भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजेश्वर कुमार ने कहा कि शांति सुमन एमडीडीएम की विभागाध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने अनवरत साहित्य साधना से हिन्दी को समृद्ध किया है। मुख्य रूप से शांति सुमन हिन्दी नवगीत की जानी-मानी चेहरा हैं और नवगीत आंदोलन में एकमात्र कवयित्री हैं। शांति सुमन पहली महिला नवगीतकार हैं। हाल ही उनकी रचना सानिध्या को मान बहादुर सम्मान प्राप्त हुआ है। यह दु:खद है कि उनकी गीतों पर आलोचकों का ध्यान अब तक नहीं गया है। उनके गीतों में संबंधों की बनुयाद को बहुत बारिकी से देखा जा सकता है।

Dr Shanti Suman सुप्रसिद्ध कवयित्री शांति सुमन की सबसे बड़ी ताकत है कि देशज बिंबो की कवयित्री हैं। मुख्य वक्ता के रूप में चितरंजन कुमार ने कहा कि ‘जल चुका हिरण’ एक मात्र प्रकाशित उपन्यास है। वह उपन्यास अद्वितीय है। 1985 में प्रकाशित यह उपन्यास इतना महत्वपूर्ण है अगर शांति सुमन और कुछ नहीं लिखती तब भी वह हमारी स्मरण में बनी रहती। उन्हें हिंदी नवगीत और हिंदी जनगीत की प्रथम कवयित्री होने का गौरव भी प्राप्त है। तमाम अस्वस्थता के बावजूद उनका साहित्य कर्म आज भी जारी है।


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि आरबीबीएम कॉलेज की सहायक आचार्य सह कवयित्री शांति सुमन की पुत्री डॉ चेतना वर्मा ने उनकी जीवन यात्रा पर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वे पहली बार विवाह करके गांव से शहर आईं और आते ही मानों संघर्षों का पिटारा खुल गया। घर-परिवार को समेटते हुए पढ़ते-पढ़ाते हुए मुठ्ठी भर आमदनी में ही बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य रचा। साथ ही संघर्ष की ️विरासत को संभालते हुए उन्होंने साहित्य की उंचाईयों को भी छुआ।

1960 से जिस साहित्यक यात्रा की शुरुआत की वह आज भी जारी है। कार्यक्रम में स्वागत भाषण थिंक बिहार रिसर्च फाउंडेशन के सचिव कुलभूषण ने किया। उन्होंने बताया कि थिंक बिहार रिसर्च फाउंडेशन बिहार के गुमनाम साहित्यकारों और व्यक्तित्वों पर केंद्रीत विमर्श को आगे बढ़ाने का काम करता है। बिहार की भाषाओं व बोलियों को केंद्र में रख कर उनके संरक्षण के लिए प्रयास करता है।

धन्यवाद ज्ञापन ओडिसा केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ विकास कुमार ने किया।

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