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MP Sinha Science College के डॉ. मु. एजाज अनवर को आईसीएआर द्वारा “सहयोगी वैज्ञानिक (एसोसिएट टेक्नोलॉजी डेवलपर)” अवॉर्ड से सम्मान

September 6, 2025 | by Goltoo

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Muzaffarpur 6 Setember : MP Sinha Science College, मुज़फ्फरपुर (बिहार) के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष, डॉ० मु० एजाज अनवर (असिस्टेंट प्रोफेसर) को राष्ट्रीय स्तर पर कृषि क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी विकसित करने हेतु “भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (कृषि मंत्रालय, भारत सरकार)” द्वारा प्रतिष्ठित “सहयोगी वैज्ञानिक (एसोसिएट टेक्नोलॉजी डेवलपर)” अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

MP Sinha Science College के डॉ. मु. एजाज अनवर

उन्होंने “एन.ए.आर.डी.एल- मॉडल फॉर एसिमेट्रिक प्राइस ट्रांसमिशन इन पेरिशेबल क्रॉप्स वैल्यू चेन (शीघ्र नष्ट होने वाली फसलों की वैल्यू चेन में असमान मूल्य प्रसारण का अध्ययन हेतु एनएआरडीएल मॉडल)” जैसी महत्वपूर्ण तकनीक के विकास में सहयोगी वैज्ञानिक (एसोसिएट डेवलपर) के रूप में विशेष योगदान दिया।

यह तकनीक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प. अर्थात ICAR) के राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान (ICAR-NIAP) द्वारा विकसित की गई है। इस टेक्नोलॉजी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने अपने तथा अपने दोनों सहयोगी वैज्ञानिकों (डॉ. एजाज एवं डॉ. दिनेश चंद मीणा) की ओर से यह प्रमाणपत्र ICAR के ए.डी.जी. (ADG) एवं भारत सरकार में प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री एवं भूतपूर्व IFPRI (साउथ एशिया) के डायरेक्टर डॉ. पी.के. जोशी से प्राप्त किया गया।

MP Sinha Science College

डॉ० एजाज, देश के प्रसिद्ध निति निर्माण संस्थान: ICAR-निआप में विगत एक दशक से भी अधिक अवधि तक कार्यरत थे, और वर्तमान में वह एम.पी. सिन्हा साइंस कॉलेज, मुज़फ्फरपुर में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर हैं। इसके अलावा वह कॉलेज में अनुसंधान एवं विकास तथा परामर्श प्रकोष्ठ के कन्वीनर के रूप में अपना काम अंजाम दे रहे हैं। उनके शोध कृषि अर्थशास्त्र, प्राइस ट्रांसमिशन, कृषि विविधीकरण, खाद्य सुरक्षा, मार्केट इंटेलीजेंस तथा सतत विकास जैसे विषयों पर केंद्रित हैं।

सम्मान प्राप्ति पर डॉ० एजाज ने कहा—
“यह सम्मान केवल मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इस उपलब्धि में मेरे पूर्व कार्य संस्थान ICAR–NIAP, एवं वर्तमान कार्य संस्थान एम.पी. सिन्हा साइंस कॉलेज (बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर), दोनों संस्थानों की सामूहिक योगदान शामिल है।”

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