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बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती, ‘एकला चलो रे’ से गूंजा सभागार

May 9, 2026 | by Goltoo

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Muzaffarpur 9 May : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के बंगला विभाग में गुरुदेव Rabindranath Tagore की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। प्रो. प्रमोद कुमार समेत कई वक्ताओं ने टैगोर के साहित्य, राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती

आज दिनांक 09 मई, 2026 को विश्वविद्यालय बंगला विभाग के सभागार में गुरुदेव Rabindranath Tagore की जन्म जयंती के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन प्रो. सुधा कुमारी की अध्यक्षता में किया गया. अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के पश्चात् उपस्थित अतिथियों का स्वागत संबोधन विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. किरणबाला रविदास ने किया. तत्पश्चात् गुरुदेव की प्रसिद्ध समूह संगीत ‘एकला चलो रे’ का गायन डॉ.सुनंदा मंडल के निदेशन में प्रस्तुत किया गया. बांग्ला विभाग के विद्यार्थी सुष्मिता, शिल्पी, पृथा, सौम्या ने संगीत गायन एवं कविता पाठ किया.

बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती
बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती
बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती
बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती

जयंती समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित हिन्दी विभाग के वरीय प्राध्यापक प्रो. प्रमोद कुमार ने रवीन्द्रनाथ टैगोर को बांग्ला नवजागरण के महत्त्वपूर्ण पुरोधा के रूप में याद करते हुए उन्हें बंग-भंग आंदोलन का सबसे चमकता हुआ चेहरा बताया. टैगोर की रचनात्मक लेखन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी भावभूमि की अभिव्यक्ति ‘गोरा’ उपन्यास में मुखर होते देखा जा सकता है. भारतीय समाज एवं राष्ट्र के लिए गोरा उपन्यास एक मार्गदर्शक रूप में है. भारतीय राष्ट्र का स्वरूप विविधता में निहित है और इसके हो रास्ते इसे पाया जा सकता है.

बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती
बंगला विभाग में धूमधाम से मनी Rabindranath Tagore जयंती

हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. आशा कुमारी ने कहा कि गुरुदेव का काव्य भारतीय संस्कृति की सम्मिलन स्थली है.
अध्यक्षीय संबोधन के दौरान प्रो. सुधा कुमारी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के प्रति श्रद्धा सुमन निवेदित करते हुए कहा कि गुरुदेव को टुकड़ों में नहीं बल्कि संपूर्णता में समझने की आवश्यकता है. उन्होंने ने कहा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय जातीय संगीत के रचयिता रहे हैं. रवींद्र संगीत उसका प्रतिनिधित्व करता है.

मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. रजनीश गुप्ता ने इस अवसर पर गुरुदेव पर केंद्रित स्वरचित कविता का पाठ किया. साथ ही उनकी रचनाओं में निहित मनोविज्ञान को काबुलीवाला एवं चोखेरवाली के माध्यम से उकेरते हुए कहा कि टैगोर की रचना मानव मन का दर्पण है.

इस अवसर पर प्रो. आशा कुमारी, अध्यक्ष हिंदी विभाग, गृह विज्ञान विभाग से प्रो. रेणु शुक्ला, प्रो कुसुम कुमारी, डॉ. विदिशा मिश्रा, हिन्दी विभाग से डॉ.सुशांत कुमार एवं मनोविज्ञान विभाग से डॉ. विकास कुमार, डॉ.सुनीता कुमारी, डॉ.किरण कुमारी सहित बांग्ला एवं हिन्दी विभाग की छात्र-छात्राएँ व शोधार्थी उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का संचालन बांग्ला विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तारक पुरकायेत एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनंदा मंडल ने किया.

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