RDS College में स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा “वर्तमान परिदृश्य में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता” पर राउंड टेबल टॉक

RDS College में स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा “वर्तमान परिदृश्य में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता” पर राउंड टेबल टॉक RDS College में स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा “वर्तमान परिदृश्य में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता” पर राउंड टेबल टॉक
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Muzaffarpur 23 December : RDS College के स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग में “वर्तमान परिदृश्य में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता” विषय पर गोलमेज चर्चा आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने दर्शन, तर्कशास्त्र एवं कैरियर से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

RDS College में राउंड टेबल टॉक

RDS College

स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र,RDS College के छात्र छात्राओं द्वारा गोलमेज चर्चा ( Round table talk) का आयोजन किया गया जिसका विषय था -” वर्तमान परिदृश्य में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता”। इस चर्चा का आरंभ छात्र सुमंत कुमार के स्वागत वक्तव्य से आरंभ हुआ। इसके बाद सभी छात्र-छात्राओं द्वारा पांच मिनट का समय अपनी बात रखने को कहा गया।इस राउंड में सभी छात्र-छात्राओं ने अपने विचार अत्यंत उत्साहपूर्वक रखें। तदोपरांत के राउंड में सभी छात्र-छात्राओं ने एक-दूसरे से प्रश्न पूछें।ये प्रश्न दर्शनशास्त्र का अर्थ,उसका उद्देश्य,कैरियर के लिए विभिन्न क्षेत्रों में दर्शनशास्त्र की क्या उपयोगिता है और किन क्षेत्रों में दर्शनशास्त्र को कैरियर के रूप में अपनाया जा सकता है, इत्यादि प्रश्न छात्र-छात्राओं द्वारा किये गयें।

RDS College में स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा “वर्तमान परिदृश्य में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता” पर राउंड टेबल टॉक

छात्र-छात्राओं के आपसी चर्चा और विमर्श के बाद इस चर्चा में उपस्थित शिक्षकों ने भी छात्र -छात्राओं के समक्ष अपने विचार रखें। सर्वप्रथम आइक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डॉ रजनीकांत ने इस तरह के विचार चर्चा के आयोजन का लाभ बताया और उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं से रचनात्मक चिंतन करने पर बल दिया। डॉ रजनीकांत ने बताया कि भले ही ऐसे विचार सीधे तौर पर लाभदायक न दिखें किंतु यह सभी ज्ञान और विज्ञान की नींव है। इसके उपरांत हिंदी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रोफेसर रमेश कुमार गुप्ता ने छात्र-छात्राओं से तर्कशास्त्र विषय पर चर्चा की।

उपस्थित छात्र-छात्राओं द्वारा प्रोफेसर रमेश कुमार गुप्ता जी से जीवन में अनुमान की उपयोगिता को लेकर प्रश्न किये। प्रोफेसर रमेश कुमार गुप्ता ने तर्कशास्त्र (Logic) के महत्व को बताते हुए कहा कि यह हमें अपने विचारों को व्यवस्थित करने, सही-गलत में भेद करने, स्पष्ट संचार करने में सहायता करता है।

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इसके उपरांत अंग्रेजी आचार्या डॉ अनिता सिंह ने एक सुसंगठित और सभ्य समाज के निर्माण में दर्शनशास्त्र की भूमिका पर अपना उद्बोधन दिया और छात्र -छात्राओं को इसके महत्व से अवगत कराया । प्रोफेसर अनिता सिंह ने कहा कि दर्शनशास्त्र ऐसा विषय है जो हमें भ्रम से निकालकर जीने की सही राह दिखाता है।

इसके बाद महाविद्यालय के प्राचार्य महोदय प्रोफेसर शशिभूषण कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं से उनका परिचय जानने के उपरांत उनके प्रश्नों और शंकाओं का समाधान किया तथा विस्तार से विषय पर चर्चा की। प्राचार्य ने समाजदर्शन, राजनीति दर्शन पर अपना वक्तव्य देने के साथ ही उन्होंने भारतीय दर्शन के स्वरूप,पूर्वी और पश्चिमी दर्शन की अवधारणा को बताया। प्रोफेसर शशिभूषण कुमार ने वसुधैव कुटुंबकम्,सर्वे भवन्तु सुखिन के दर्शन को बताया। साथ ही उन्होंने स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र के छात्र-छात्राओं की इस आयोजन के लिए प्रशंसा करते हुए ऐसे और भी कार्यक्रमों को आयोजित करने को कहा जिसमें छात्र-छात्राओं की अधिक से अधिक भागीदारी हो।

दर्शनशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ अनुराधा पाठक ने गोलमेज चर्चा कार्यक्रम को आयोजित करने का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि यह विचारों को स्पष्ट रूप से समझने, तार्किक रूप से अपने विचारों को अभिव्यक्त करने और प्रभावी ढंग से लिखने व बोलने की क्षमता विकसित करता है।
अंत में छात्र रत्नेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह आयोजन समाप्त हुआ।

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