GoltooNews

Shri Mata Vaishno Devi University के कुलपति डॉ. प्रगति कुमार को दो वर्ष का कार्यकाल विस्तार, जम्मू-कश्मीर में ‘एक्सटेंडेड लीडरशिप’ का बढ़ता ट्रेंड

April 24, 2026 | by Goltoo

goltoo – 2026-04-24T210002.90212

Jammu/Muzaffarpur 24 April : Shri Mata Vaishno Devi University के कुलपति डॉ. प्रगति कुमार को दो वर्ष का कार्यकाल विस्तार मिला, जबकि जम्मू-कश्मीर में 9 में से 6 विश्वविद्यालय विस्तारित नेतृत्व के तहत संचालित हो रहे हैं।

Shri Mata Vaishno Devi University के कुलपति को दो वर्ष का कार्यकाल विस्तार

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के तहत Shri Mata Vaishno Devi University (SMVDU) के कुलपति डॉ. प्रगति कुमार को उनके सफल तीन वर्षीय कार्यकाल के उपरांत दो वर्षों का सेवा विस्तार प्रदान किया गया है। उनका वर्तमान कार्यकाल आगामी जून में पूर्ण होने वाला है, जिसके बाद वे अगले दो वर्षों तक विश्वविद्यालय का नेतृत्व करते रहेंगे।

डॉ. प्रगति कुमार एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक परिवार से संबंध रखते हैं। वे स्वर्गीय प्रो. एन.के.पी. सिन्हा और प्रो. राज कुमारी के पुत्र हैं। उनके बड़े भाई डॉ. क्रांति कुमार, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जबकि उनकी भाभी बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के संस्कृत विभाग में प्रोफेसर हैं।

Shri Mata Vaishno Devi University के कुलपति डॉ. प्रगति कुमार को दो वर्ष का कार्यकाल विस्तार
Shri Mata Vaishno Devi University के कुलपति डॉ. प्रगति कुमार को दो वर्ष का कार्यकाल विस्तार

इसी क्रम में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के कुलपति के कार्यकाल में भी आधिकारिक आदेश के तहत विस्तार किया गया है। इस प्रशासनिक निर्णय के बाद अब जम्मू-कश्मीर के कुल नौ राज्य विश्वविद्यालयों में से छह विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां कुलपति अपने मूल कार्यकाल से आगे बढ़े हुए कार्यकाल में कार्य कर रहे हैं।

इन विस्तारों की अवधि अलग-अलग है—जहां डॉ. प्रगति कुमार को दो वर्षों का अतिरिक्त कार्यकाल मिला है, वहीं दूसरे कुलपति को 65 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु तक पद पर बने रहने की अनुमति दी गई है।

यह परिदृश्य जम्मू-कश्मीर के उच्च शिक्षा तंत्र में एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहां नेतृत्व में निरंतरता को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां यह निर्णय संस्थागत स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है, वहीं इससे नए नेतृत्व और नवाचार के अवसरों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

इस प्रकार, वर्तमान में जम्मू-कश्मीर का उच्च शिक्षा प्रशासन एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां ‘एक्सटेंडेड लीडरशिप’ नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है और यह क्षेत्र के शैक्षणिक ढांचे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

RELATED POSTS

View all

view all