Muzaffarpur 26 January : Asian Waterbird Census 2026 के तहत मुजफ्फरपुर में बर्ड सेंसस के दूसरे दिन विशेषज्ञ टीम ने झपहां चौड़, कांटी मन और बनियाराही चौर का भ्रमण किया। झपहां चौड़ में पानी न होने से जलीय पक्षी नहीं मिले, जबकि अन्य जलाशयों में पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। सर्वे रिपोर्ट प्रमंडल व राज्य को भेजी जाएगी।
Asian Waterbird Census मुजफ्फरपुर में सर्वे
Asian Waterbird Census 2026 के तहत जिले में चल रहे बर्ड काउंट के दूसरे दिन बर्ड सेंसस टीम ने झपहां चौड़, कांटी मन और बनियाराही चौर का भ्रमण कर पक्षियों की गणना की। यह सर्वे कार्य बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व तिरहुत वन प्रमंडल के डीएफओ नरेंद्र पाल सिंह द्वारा किया जा रहा है।

बर्ड सेंसस टीम का नेतृत्व बर्ड एक्सपर्ट एवं एशियन वॉटर सेंसस कोऑर्डिनेटर, एसएनएस कॉलेज हाजीपुर के जन्तु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येन्द्र कुमार कर रहे हैं। टीम में रामेश्वर महाविद्यालय के डॉ. धीरज कुमार, आरडीएस कॉलेज मुजफ्फरपुर के जन्तु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष मिश्रा, बिहार विश्वविद्यालय की पक्षी शोध छात्रा अनुपमा जायसवाल, बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा की जन्तु विज्ञान शोध छात्रा अनु कुमारी एवं आरएन कॉलेज के जन्तु विज्ञान के छात्र कुमार आनंद शामिल रहे। वहीं वन विभाग की ओर से तिरहुत वन प्रमंडल के रेंज ऑफिसर विकास कुमार पांडे, वन रक्षी मक़शूद आलम एवं सोनू कुमार भी इस अभियान में मौजूद रहे।

डॉ. सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि झपहां चौड़ में पानी का नामोनिशान नहीं था, जिसके कारण वहां किसी भी जलीय पक्षी की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। जबकि कांटी मन और बनियाराही चौर में पानी उपलब्ध होने के कारण विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखे गए। सभी प्राप्त आंकड़ों को संकलित कर प्रमंडल एवं राज्य स्तर पर भेजा जाएगा।
Tirhut Forest Division के वेटलैंड्स में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस-26 की शुरुआत, पहले दिन चिड़ियों की गिनती https://t.co/O2RoihZu2d pic.twitter.com/CKJqWJflSn
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) January 25, 2026
इस अवसर पर डॉ. धीरज कुमार और डॉ. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि मुजफ्फरपुर एवं इसके आसपास मौजूद सभी जलाशयों में वर्षभर पानी बना रहना बेहद जरूरी है। जलाशयों के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। तभी जलीय जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को बढ़ावा मिल सकेगा।
एशियन वॉटर सेंसस के माध्यम से जलाशयों की स्थिति और जलीय पक्षियों की संख्या का वैज्ञानिक आकलन कर संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।