Patna 7 September : Bihar University Service Rules 2026 – बिहार विश्वविद्यालयों के प्रस्तावित 2026 सेवा संशोधनों में वरिष्ठता, महिला विशेष अवकाश, पितृत्व अवकाश, सब्बेटिकल और पेटेंट नियमों में बदलाव चर्चा में।
Bihar University Service Rules 2026
बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों को लेकर प्रस्तावित 2026 संशोधन कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को सामने लाते हैं। Statute of the General Conditions of Service से जुड़े इन प्रावधानों का असर नियुक्ति, वरिष्ठता, अवकाश, शोध, बौद्धिक संपदा और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। उपलब्ध मसौदा संबंधी जानकारी के अनुसार, नियमों में एक ओर महिला कर्मचारियों के लिए हर महीने दो दिन की विशेष छुट्टी, पितृत्व अवकाश और गोद लेने अथवा सरोगेसी से जुड़े अवकाश का प्रावधान है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठता तय करने से लेकर विश्वविद्यालय से जुड़े शोध पर पेटेंट लेने तक संस्थागत नियंत्रण की स्पष्ट व्यवस्था दिखाई देती है।
2026 के प्रस्तावित संशोधनों में महिला कर्मचारियों की विशेष छुट्टी, पितृत्व अवकाश, सब्बेटिकल, वरिष्ठता निर्धारण और शोध से जुड़े पेटेंट अधिकार जैसे प्रावधान चर्चा में
वरिष्ठता में बराबरी हुई तो नाम का पहला अक्षर तय कर सकता है क्रम
प्रस्तावित नियमों में वरिष्ठता निर्धारण के लिए कई चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले आयोग द्वारा अनुशंसित मेरिट सूची, इसके बाद सेवा में योगदान की तारीख और फिर जन्मतिथि को आधार बनाया जाता है। लेकिन यदि दो विश्वविद्यालय सेवकों की मेरिट, योगदान की तारीख और जन्मतिथि भी समान हो जाए, तो वरिष्ठता का निर्धारण वर्णक्रम यानी Alphabetical Order से किया जाएगा। यह प्रावधान दुर्लभ स्थिति में प्रशासनिक गतिरोध समाप्त करने का एक निश्चित तरीका माना जा सकता है।
महिला कर्मचारियों के लिए हर महीने दो दिन विशेष अवकाश
सेवा शर्तों में महिला विश्वविद्यालय कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के मौजूदा निर्देशों के तहत सभी महिला कर्मचारियों को प्रत्येक महीने दो दिन का विशेष अवकाश दिए जाने की व्यवस्था है। यह प्रावधान विश्वविद्यालयों में कार्यरत महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्यस्थल संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखने वाला कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए पितृत्व अवकाश का भी प्रावधान है। पुरुष शिक्षकों को पत्नी के प्रसव के समय 15 दिनों तक का अवकाश मिल सकता है। यह सुविधा अधिकतम दो बच्चों के जन्म तक सीमित बताई गई है और इसके लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी। गोद लेने और सरोगेसी से जुड़े अवकाश को भी राज्य सरकार के लागू नियमों के अनुसार नियंत्रित किए जाने का उल्लेख है।

सात साल की सेवा के बाद सब्बेटिकल का प्रावधान
विश्वविद्यालय शिक्षकों के लिए Sabbatical Leave भी महत्वपूर्ण प्रावधानों में शामिल है। स्थायी और पूर्णकालिक शिक्षक, जिन्होंने रीडर/एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर के रूप में लगातार सात वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, वे निर्धारित शर्तों के तहत सब्बेटिकल अवकाश के पात्र हो सकते हैं।
इसका उद्देश्य शिक्षक की विशेषज्ञता और दक्षता बढ़ाने तथा उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालय के लिए उनकी उपयोगिता को बेहतर करना बताया गया है। हालांकि यह अवकाश एक बार में अधिकतम एक वर्ष और पूरे सेवाकाल में कुल दो वर्ष तक सीमित रहने की व्यवस्था बताई गई है। इससे शोध और अकादमिक विकास के अवसरों के साथ विश्वविद्यालय में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
संक्रामक बीमारी की स्थिति में क्वारंटीन अवकाश
प्रस्तावित सेवा नियमों में Quarantine Leave से संबंधित व्यवस्था भी मौजूद है। यदि किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के परिवार में संक्रामक बीमारी फैलती है, तो सक्षम प्राधिकारी उसे कार्यालय आने से रोकने का निर्णय ले सकता है। इसमें चेचक, प्लेग, हैजा, डिप्थीरिया और मेनिन्जाइटिस जैसी बीमारियों का उल्लेख है।
नियमों में भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी अन्य बीमारी को भी शामिल करने की गुंजाइश रखी गई है, जिसे राज्य सरकार संक्रामक घोषित करे। इससे बदलती सार्वजनिक स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुसार प्रशासन को कार्रवाई करने का कानूनी आधार मिल सकता है।
विश्वविद्यालय की राय के लिए 10 दिन की समयसीमा
Bihar University Service Rules 2026 – राज्यपाल सचिवालय से 5 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों पर कुलपतियों से 15 सितंबर 2026 तक राय मांगी गई है। मसौदे पर राय देने के लिए विश्वविद्यालयों को सीमित समय दिया गया है।
इसमें एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रावधान Section 36(7) से जुड़ा है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर विश्वविद्यालय अपनी राय नहीं देता है, तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे संशोधनों से सहमति के रूप में माना जा सकता है। यह व्यवस्था प्रशासनिक प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित करने के साथ विश्वविद्यालयों के लिए समय पर अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज कराने को महत्वपूर्ण बनाती है।

शोध और पेटेंट पर विश्वविद्यालय की अनुमति जरूरी
Bihar University Service Rules 2026 – शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक बौद्धिक संपदा और पेटेंट से संबंधित है। यदि किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के कार्य में वैज्ञानिक या तकनीकी शोध शामिल है और उससे जुड़ा कोई आविष्कार सामने आता है, तो विश्वविद्यालय के काम से संबंधित उस आविष्कार के लिए पेटेंट आवेदन करने से पहले अनुमति की आवश्यकता होगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Syndicate पेटेंट से जुड़े अधिकारों और शर्तों पर निर्णय लेने वाली प्रमुख संस्था होगी। इससे विश्वविद्यालय के हित और व्यक्तिगत शोधकर्ता के बौद्धिक अधिकारों के बीच संतुलन का प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है। आधुनिक उच्च शिक्षा व्यवस्था में शोध, नवाचार और पेटेंट तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं, इसलिए यह प्रावधान विश्वविद्यालयों और शोधकर्ताओं दोनों के लिए खास मायने रखता है।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) September 7, 2026
पुराने कानूनों से आधुनिक विश्वविद्यालय व्यवस्था तक
इन प्रस्तावित संशोधनों की पृष्ठभूमि बिहार के विश्वविद्यालयों से जुड़े सेवा नियमों और Bihar State Universities Act, 1976 तथा Patna University Act, 1976 से जुड़ी व्यवस्था में देखी जा सकती है। वरिष्ठता जैसे पारंपरिक प्रशासनिक नियमों से लेकर महिला कर्मचारियों के विशेष अवकाश, पितृत्व, सरोगेसी, सब्बेटिकल और पेटेंट जैसे आधुनिक विषयों को एक ही सेवा ढांचे में शामिल करने की कोशिश दिखाई देती है।
इन नियमों का अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित संशोधनों को किस रूप में स्वीकृति मिलती है और लागू होने के बाद संबंधित विश्वविद्यालयों में उनका क्रियान्वयन कैसे किया जाता है। फिलहाल, मसौदा विश्वविद्यालयों के प्रशासन, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना हुआ है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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