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B.R.A. Bihar University और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन

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Muzaffarpur 19 July : बीआरए Bihar University और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सहयोग के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.
इस सहयोग का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक अवसरों और आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ाना है.

Bihar University MOU

समझौते पर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय की मौजूदगी में रजिस्ट्रार डॉ अपराजिता कृष्णा तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ एसके श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए.

B.R.A. Bihar University और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन
B.R.A. Bihar University और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन

मौके पर कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय ने कहा समझौते के मसौदे में साझा सेमिनार एवं अन्य अकादमिक गतिविधियों के माध्यम बैठकों और चर्चाओं के माध्यम से अनुसंधान पर जानकारी का आदान-प्रदान – छात्र और शिक्षक विनिमय कार्यक्रम, शिक्षण सामग्री, पांडुलिपियां और संस्कृत और इसके संबद्ध विषयों से संबंधित अन्य स्रोत और परियोजनाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष योगदान देना है. साथ ही, संस्थागत विकास के लिए शैक्षिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा पर भी समझौते में जोर दिया गया है. उन्होंने आशा व्यक्त किया कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से दोनों संस्थानों की शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह छात्रों और संकाय सदस्यों को परियोजनाओं और अनुसंधान गतिविधियों पर सहयोग करने के अवसर भी प्रदान करेगा, जिससे ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान होगा. कुलपति प्रो राय ने कहा कि इस समझौते का एक अन्य मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन का संस्कृत और भारतीय संस्कृति के अध्धयन को सभी संकाय के छात्रों के बीच बढ़ावा देने का प्रयास है.

भारतीय संस्कृति और सभ्यता का आधार संस्कृत भाषा ही है. जिन वेद, उपनिषद जैसे ग्रंथों को भारत की पहचान माना जाता है वे संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं और कोई भी इस भाषा को जाने बिना उनके मर्म को नहीं समझ सकता. समय के साथ जैसे-जैसे संस्कृत का प्रसार कम होता गया वैसे-वैसे वेद-उपनिषद भी लोगों की स्मृति से ओझल होते गए. परिणाम यह हुआ कि जो ज्ञान इन ग्रंथों में है उसका पूरा लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है.


मौके पर प्रॉक्टर प्रो बीएस राय, प्रो कल्याण कुमार झा, डॉ अमर बहादुर शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।

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