Muzaffarpur 26 May : Banaras Hindu University के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर दिनेश चंद्र राय के मार्गदर्शन में घी का हर्बल फोर्टिफिकेशन विकसित किया, जिसमें करक्यूमिन का उपयोग किया गया। इस विधि से घी के कार्यात्मक गुण और भंडारण क्षमता में सुधार हुआ है।
Banaras Hindu University हर्बल घी बनाने की विधि
Banaras Hindu University के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर दिनेश चंद्र राय, कुलपति, डॉ भीमराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी के मार्गदर्शन में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग में घी (संस्कृत : घृत) हर्बल की विधि विकसित की (शोधकर्ताओं ने घी के कार्यात्मक गुणों एवं अधिक समय तक भंडारण एवं उपयोग हेतु घी में करक्यूमिन (हल्दी) का फोर्टिफिकेशन किया.

इस प्रयोग में घी में करक्यूमिन को घी बनाते वक्त डाला गया (करक्यूमिन हल्दी में पाए जाने वाला एक तत्व होता है जिसके कारण हल्दी को पीला रंग मिलता है और साथ ही करक्यूमिन में काफी शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण होने वाले नुकसान से बचाते हैं. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण होने वाले कहीं बीमारियों का रिस्क जैसे कैंसर, अल्जाइमर, तथा, दिल की बीमारी से बचा जा सकता है.

हल्दी के कारण इन फ्री रेडिकल्स का प्रभाव न्यूट्रलाइज होता है और बीमारियों का खतरा कम होता है. करक्यूमिन फोर्टिफिकेशन के कारण घी में विभिन्न गुणकारी प्रभाव देखे गए. करक्यूमिन के फोर्टिफिकेशन करने से भी में कैंसर रोधी गुण भी देखे गए और अन्य प्रयोगात्मक जांचों से घी के विभिन्न गुणकारी परिवर्तन देखे गए. जिससे यह सिद्ध हुआ कि विकसित हर्बल घी खाने से विभिन्न रोगों के खिलाफ लड़ने अथवा उनसे बचाव की प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो सकती है, साथ ही यह भी सिद्ध हुआ की करक्यूमिन के समायोजन से घी को अधिक समय तक भंडारण किया जा सकता है, क्योंकि करक्यूमिन (हल्दी) के समायोजन में घी में जल्द खराब होने वाली होने वाली प्रतिक्रियाओ में कमी देखी गई. जिससे घी को लंबे समय तक सभी गुणों के साथ प्रयोग किया जा सकता है.
Honourable VC BRABU Dr DC Rai in a seminar in senate hall. #kulgeet #muzaffarpur #goltoo @brabu_ac_in pic.twitter.com/zwZAXRg3aA
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) May 24, 2024
इस शोध को Banaras Hindu University अथवा आईआईटी (बीएचयू) के संयुक्त टीम ने प्रोफेसर दिनेश चंद्र राय के मार्गदर्शन में पूरा किया और इसे एल्सेवियर, नीदरलैंड के प्रतिष्ठित जर्नल फूड एंड ह्यूमैनिटी (Food and Humanity) में प्रकाशित किया गया. इस शोध टीम में सदस्यों में बीएचयू के डॉक्टर सुनील मीणा, सहायक प्राध्यापक, प्रोफेसर राजकुमार दुआरी, सुश्री अनीता राज एवं सुश्री बी कीर्ति रेड्डी, शोध छात्राएँ एवं एवं आईआईटी बीएचयू के सहायक प्रोफेसर जयराम मीणा शामिल रहे. इस शोध को बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (IOE) अनुदान के सहयोग से पूरा किया गया .
RDS College के उर्दू विभाग में 31 मई को राष्ट्रीय संगोष्ठी https://t.co/6TBAqiUAvT #Muzaffarpur #goltoo @brabu_ac_in pic.twitter.com/fEr66P2m4H
— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) May 26, 2024
कुलपति प्रो राय ने कहा कि अकादमिक शोध का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक प्रगति हासिल करने के बजाय वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने पर केंद्रित होना चाहिए. सामाजिक जरूरतों के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कुलपति प्रो. राय की प्रतिबद्धता और पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान करने के उद्देश्य से अनुसंधान परियोजनाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी,रिसर्च के माध्यम से समाज पर सार्थक प्रभाव डालने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करती है.
Banaras Hindu University तथा बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षको और शोधकर्ताओं ने इसके लिए कुलपति प्रो राय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की. कुलपति प्रो. राय और उनकी शोध टीम का शोध के प्रति व्यवहारिक दृष्टिकोण पौष्टिक भोजन विकल्पों तक सीमित पहुंच वाले समुदायों और व्यक्तियों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए उनकी वास्तविक चिंता को दर्शाता है. इन शोध प्रयासों को सक्रिय रूप से समर्थन और नेतृत्व करके, कुलपति प्रो. राय समाज के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार लाने में एक ठोस बदलाव ला रहे हैं.
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनके चार महीने के कार्यकाल में फंक्शनल फूड में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए गए हैं. डेयरी प्रौद्योगिकी में डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की पहल इस क्षेत्र के स्थान केंद्रित खाद्य पदार्थों की लंबे समय तक भंडारण और पोषण मापदंडों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा एक और मील का पत्थर कदम है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।