Muzaffarpur 14 February : Bharti Shikshak Prashikshan Mahavidyalay के वंदना सभागार में दिनांक 11 फरवरी से 14 फरवरी तक आयोजित संघ शताब्दी प्रधानाचार्य सम्मेलन आज अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह चार दिवसीय सम्मेलन शैक्षिक गुणवत्ता, संस्थागत विकास, नवाचार तथा भावी कार्ययोजनाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
Bharti Shikshak Prashikshan Mahavidyalay संघ शताब्दी प्रधानाचार्य सम्मेलन
अंतिम दिवस पर समीक्षा बैठक एवं मार्गदर्शन
सम्मेलन के अंतिम दिन एक महत्वपूर्ण समीक्षा एवं मार्गदर्शन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मंचासीन देशराज शर्मा, अखिल भारतीय महामंत्री; रामलाल सिंह, प्रदेश सचिव; डॉ. सुबोध कुमार, मंत्री, लोक शिक्षा समिति; पंकज कुमार, सह सचिव, भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय; राजेश रंजन, विभाग निरीक्षक, लोक शिक्षा समिति, मुजफ्फरपुर; ललित कुमार राय, विभाग निरीक्षक, चंपारण सहित प्रांत के समस्त प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।

विद्यालयों में अधिगम संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल
अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभी विद्यालयों में अधिगम संस्कृति (Learning Culture) का सशक्त वातावरण विकसित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए—
प्रभावी शिक्षण पद्धतियों (Teaching Models) की सतत समीक्षा
प्रेरणा एवं मार्गदर्शन हेतु विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित करना
ठोस कार्ययोजना (Action Plan) का निर्माण
वार्षिक लक्ष्यों के अनुरूप स्पष्ट कार्यान्वयन योजना एवं समय-सीमा का निर्धारण
पाठ योजना (Lesson Plan) की नियमित निगरानी
अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“विद्यालय या संस्था में कार्य ही बोलता है। औचित्य सिद्ध करने के लिए शब्दों का सहारा लेना व्यर्थ है।”
साथ ही उन्होंने सभी शैक्षिक परियोजनाओं पर पूर्ण गंभीरता से कार्य करने तथा गुणवत्ता के स्तर से किसी भी प्रकार का समझौता न करने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय भाषण: Critical Thinking एवं Problem Solving पर विशेष फोकस
सम्मेलन के अध्यक्षीय भाषण में डॉ. सुबोध कुमार जी ने Critical Thinking एवं Problem Solving Skills को समकालीन शिक्षा की आत्मा बताते हुए कहा कि आज की शिक्षा का उद्देश्य केवल विषयवस्तु का ज्ञान कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, विश्लेषण क्षमता, निर्णय लेने की दक्षता और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की योग्यता विकसित करना है।
उन्होंने प्रधानाचार्यों से आग्रह किया कि विद्यालयों में प्रश्न-आधारित शिक्षण, गतिविधि-आधारित अधिगम तथा अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा दिया जाए, ताकि विद्यार्थी वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान स्वयं खोज सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक शिक्षण संस्थानों में सोचने की स्वतंत्रता, तर्क करने का अवसर और समस्या से सीखने की संस्कृति विकसित नहीं होगी, तब तक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी शिक्षा की संकल्पना अधूरी रहेगी।
उनका अध्यक्षीय वक्तव्य सम्मेलन को वैचारिक दृष्टि से और अधिक सुदृढ़ एवं उद्देश्यपूर्ण दिशा प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ।
पुस्तक विमोचन एवं शैक्षिक अधोसंरचना का विस्तार
सम्मेलन के दौरान भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में ‘बुद्ध और अंबेडकर’ पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया। इस पुस्तक के लेखक सुकन पासवान, पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं।
इसके अतिरिक्त महाविद्यालय परिसर में लिफ्ट सुविधा का शुभारंभ किया गया तथा चौथी मंज़िल पर स्थित रज्जू भैया पुस्तकालय को नवीन स्वरूप प्रदान करते हुए डिजिटल स्तर पर प्रारंभ किया गया। इससे शोधार्थियों एवं प्रशिक्षुओं को आधुनिक अध्ययन एवं अनुसंधान सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
भविष्य की कार्ययोजना एवं संगठनात्मक संकल्प
सम्मेलन में लोक शिक्षा समिति से संबद्ध सभी विद्यालयों के लिए वर्ष भर शैक्षिक क्षेत्र में नवीन एवं नवाचारी गतिविधियाँ संचालित करने की समग्र योजना तैयार की गई।
नए विद्यालयों की स्थापना, विकसित विद्यालयों का विस्तार तथा बड़े शैक्षिक परिसरों के निर्माण की दिशा में ठोस संगठनात्मक संकल्प लिया गया।
सभी उपस्थित प्रधानाचार्यों ने यह सामूहिक संकल्प व्यक्त किया कि सम्मेलन में निर्धारित सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाएगा।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री का प्रेरक संबोधन
समापन सत्र में काली राम, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, ने अपने प्रेरक वक्तव्य में सभी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा—
“प्रधानाचार्य केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि संस्था की आत्मा होते हैं। उनके विचार, आचरण और कार्यशैली से ही विद्यालय की पहचान बनती है।”
उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से आग्रह किया कि वे संगठन द्वारा तय किए गए संकल्पों को केवल कागज़ तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें व्यवहार, अनुशासन और परिणाम के रूप में धरातल पर उतारें।
शैक्षिक विमर्श एवं सांस्कृतिक सहभागिता
इस अवसर पर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से संबद्ध डॉ. दिनेश चंद्र राय (केबीसी) ने “गाय, गंगा और गाँव” विषय पर विचार साझा करते हुए सामाजिक चेतना और ग्रामीण सशक्तिकरण पर प्रकाश डाला।
उन्होंने किसान चाची द्वारा महिलाओं के उत्थान हेतु किए गए प्रयासों को एक सशक्त सामाजिक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
डॉ. ललित किशोर एवं पंकज कुमार, प्रदेश सचिव, ने जिला केंद्रों एवं जिला मुख्यालयों को संगठनात्मक रूप से और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के दौरान संस्कृति एवं बौद्ध परियोजना में सभी सहभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) February 13, 2026
धन्यवाद ज्ञापन एवं समापन
कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने सभी अतिथियों, प्रधानाचार्यों एवं सहभागियों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
प्रदेश सचिव रामलाल सिंह जी ने सभी को अपने-अपने दायित्वों के प्रति व्यवस्थित, समर्पित एवं लक्ष्यनिष्ठ रहने की शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य के लिए अग्रिम बधाई दी।
इस प्रकार चार दिवसीय संघ शताब्दी प्रधानाचार्य सम्मेलन को अगले प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन तक के लिए विधिवत रूप से संपन्न घोषित किया गया।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।