Muzaffarpur 20 January : Bihar University के वनस्पति विज्ञान विभाग में “क्लाइमेट चेंज एंड बोटैनिकल रिसर्च” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन छह तकनीकी सत्र हुए, जिनमें माइक्रो प्लास्टिक, बायो-एथेनॉल और जलवायु परिवर्तन पर शोध व नवाचार पर चर्चा की गई।
- राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन छह तकनीकी सत्र, जलवायु परिवर्तन पर हुआ गहन मंथन
- माइक्रो प्लास्टिक से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर खतरा, शोध व समाधान पर जोर
- पुआल से बायो-एथेनॉल उत्पादन को बताया पर्यावरण अनुकूल और किसानों के लिए लाभकारी
Bihar University वनस्पति विज्ञान विभाग राष्ट्रीय सेमिनार
Bihar University के वनस्पति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में “क्लाइमेट चेंज एंड बोटैनिकल रिसर्च” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन कुल छह तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।

इन तकनीकी सत्रों का नेतृत्व क्रमशः लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. अलका कुमारी, पटना विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र प्रसाद, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली की प्रो. तनुजा, रांची यूनिवर्सिटी, झारखंड की प्रो. लाडली रानी, नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी, रायपुर के प्रो. नवीन कुमार शर्मा तथा विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एल. एन. शुक्ला ने किया।

प्रथम तकनीकी सत्र में जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली की प्रो. तनुजा ने पर्यावरण में माइक्रो प्लास्टिक को एक गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि माइक्रो प्लास्टिक मिट्टी, हवा और पानी को प्रदूषित कर रहे हैं, जिसका सबसे अधिक प्रभाव मानव फेफड़ों पर पड़ रहा है। माइक्रो प्लास्टिक के प्रमुख स्रोत कपड़ों से निकलने वाले फाइबर, टायर का घिसाव, सौंदर्य प्रसाधन और बड़े प्लास्टिक का टूटना हैं। इससे बचाव के लिए प्लास्टिक मुक्त विकल्प अपनाने तथा पीपल और नीम जैसे बड़े पत्तों वाले पौधों के रोपण पर जोर दिया।

दूसरे तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र प्रसाद ने पुआल से एथेनॉल निर्माण को दूसरी पीढ़ी का बायो-एथेनॉल प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में भारत सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं और वनस्पति विज्ञान के शोधार्थियों को इस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी बन सकती है। उन्होंने पुआल से एथेनॉल उत्पादन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
अन्य तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए आमंत्रित वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को केंद्र में रखकर शोध और नवाचार को बढ़ावा देना समय की मांग है, जिसमें वनस्पति विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी और बायोलॉजिकल साइंस के छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) January 19, 2026
विभागाध्यक्ष प्रो. रंजना कुमारी ने सभी आमंत्रित वक्ताओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि तकनीकी सत्रों से छात्रों और शिक्षकों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े शोध के नए आयामों को समझने का अवसर मिला है।
तकनीकी सत्रों में कुल 50 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जबकि 12 छात्रों ने जलवायु परिवर्तन पर आधारित पोस्टर प्रस्तुति दी, जिसे अतिथियों ने सराहा।
सत्रों के सफल संयोजन में डॉ. नीलम कुमारी, डॉ. रितिका, डॉ. गौरव पांडे, डॉ. पूनम, डॉ. नीति, डॉ. कादंबनी सहित विभाग के अन्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।