www.goltoo.in

RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी, ‘प्रेमचंद के साहित्य में लोक-संस्कृति’ पर हुआ मंथन

July 31, 2026 | by Goltoo

manjujee12

Muzaffarpur 31 July : रामवृक्ष बेनीपुरी महिला महाविद्यालय (RBBM College) में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर ‘प्रेमचंद के साहित्य में लोक-संस्कृति’ विषयक संगोष्ठी आयोजित, 300 छात्राओं ने लिया भाग।

RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी

स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, रामवृक्ष बेनीपुरी महिला महाविद्यालय द्वारा आज दिनांक 31 जुलाई 2026 को “मुंशी प्रेमचंद जयंती “के पुनीत अवसर पर ‘प्रेमचंद के साहित्य में लोक-संस्कृति’ विषय पर ‘एकदिवसीय संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. मधु सिंह ने की।

RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी
RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी

मुख्य वक्ता डॉ आशीष कांता , सहायक प्राध्यापक , स्नातकोत्तर हिंदी विभाग,रामदयालु सिंह महाविद्यालय का सारगर्भित ,संतुलित व्याख्यान ने छात्राओं का ज्ञानवर्धन किया। स्वागत एवं विषय प्रवेश डॉ हेमा ने किया। अपने वक्तव्य में डॉ हेमा ने कहा – मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में लोक संस्कृति भारतीय ग्रामीण जीवन की आत्मा बनकर आती है। उनके उपन्यासों और कहानियों में लोकगीत, लोकत्योहार, रीति-रिवाजों और मेलों का सजीव चित्रण मिलता है, जो कृषक समाज के सुख-दुख और उनके वास्तविक संघर्षों को गहराई से उजागर करता है।

RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी
RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी

मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ. आशीष कुमारी कांता ने’मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में लोक संस्कृति’ विषय पर अपना विचार व्यक्त किया । डॉ. कांता ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य को लोक संस्कृति के नजरिये से विस्तृत रूप से समझाया, उन्होंने अपने वक्तव्य में प्रेमचंद के लगभग 10 से अधिक कहानियों, उपन्यासों, आदि के बारे में बताया। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य को शोषित , वंचितों का साहित्य कहा जिसमें लोकसंस्कृति की स्वर्णिम आभा के साथ सुलगता दर्द भी है और तत्कालीन सामाजिक यथार्थ का वीभत्स चित्रण भी है।

RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी
RBBM College में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी

अपने अध्यक्षीय भाषण में प्राचार्य डॉ मधु सिंह ने कहा – मुंशी प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज, विशेषकर गाँवों, किसानों और शोषितों के जीवन का यथार्थवादी और सजीव दर्पण है। उन्होंने अपनी रचनाओं में सामाजिक कुरीतियों, जातिगत भेदभाव और आर्थिक विषमता को बहुत प्रभावशाली ढंग से उठाया है। उनका साहित्य आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का अनूठा संगम है, जो मानवता और न्याय की प्रेरणा देता है।

हिन्दी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ प्रियंका ने अपने वक्तव्य में मुंशी प्रेमचंद को ‘कलम का सिपाही’ संबोधित करते हुए उनकी रचनाओं में लोक-संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला ।

इस अवसर पर डॉ. रेणु बाला, डॉ. निशात फ़ातिमा, डॉ. अंजू सिंह, डॉ. कंचन, डॉ. अफरोज, डॉ. धनंजय झा एवं महाविद्यालय परिवार के उपस्थित सभी विभागाध्यक्ष ,शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्राओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का संचालन स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा अर्चना ने किया। इस कार्यक्रम में लगभग 300 छात्राओं की उपस्थिति रही । स्नातक हिन्दी चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा रक्षा ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।

राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

RELATED POSTS

View all

view all