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RDS College में पुस्तकालय जगत के जनक डॉ एस आर रंगनाथन जन्मोत्सव सह दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी

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Muzaffarpur 12 August : RDS College के पुस्तकालय भवन में पुस्तकालय जगत के जनक डॉ एस आर रंगनाथन जन्मोत्सव सह दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

RDS College में पुस्तक प्रदर्शनी

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पुस्तकालय एक जीवंत एवं गतिशील संस्था है: प्राचार्य डॉ अनिता सिंह

RDS College के पुस्तकालय भवन में पुस्तकालय जगत के जनक डॉ एस आर रंगनाथन जन्मोत्सव सह दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
RDS College के पुस्तकालय भवन में पुस्तकालय जगत के जनक डॉ एस आर रंगनाथन जन्मोत्सव सह दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
RDS College के पुस्तकालय भवन में पुस्तकालय जगत के जनक डॉ एस आर रंगनाथन जन्मोत्सव सह दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
RDS College के पुस्तकालय भवन में पुस्तकालय जगत के जनक डॉ एस आर रंगनाथन जन्मोत्सव सह दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
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*डॉ रंगनाथन के चित्र पर माल्यार्पण कर शिक्षक एवं कर्मचारियों ने पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों पर चर्चा की। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अनिता सिंह ने डॉ रंगनाथन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारत के महान गणितज्ञ तथा पुस्तकालय जगत के जनक थे।

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पुस्तकालय विज्ञान को महत्व प्रदान करने तथा भारत में इसका प्रचार-प्रसार करने में इनका सक्रिय योगदान था। मद्रास यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लाइब्रेरी साइंस के पांच नियम बताए थे जो लाइब्रेरियनशिप के लिए एक मार्गदर्शिका है। उन्हें वर्ष 1957 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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पुस्तकालय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकालय एक जीवंत एवं गतिशील संस्था है। शिक्षक एवं छात्रों को इसका लाभ उठाना चाहिए। पुस्तकालय से बेहतर दोस्त एवं अभिभावक दूसरा कोई नहीं हो सकता। शिक्षक एवं छात्रों को यह संस्था संपूर्ण ज्ञान से साक्षात्कार कराता है।

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पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ पूनम कुमारी ने कहा कि डॉ एस आर रंगनाथन ने बुनियादी वैज्ञानिक पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के सिद्धांतों को स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया। पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के क्षेत्र में गहन ज्ञान प्राप्त करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ लंदन में जाकर अध्ययन किया। वहां से आने के बाद उन्होंने ‘कोलोन वर्गीकरण कैटलॉग’ प्रस्तुत किया। आज यह प्रचलन में है। बताया कि रंगनाथन की पुस्तक “लाइब्रेरी साइंस के पांच नियम” पूरी दुनिया में पढ़ी जाती है और ये नियम पुस्तकालय विज्ञान के छात्रों एवं शिक्षकों के लिए ग्रहणीय एवं संदेशप्रद है।

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पुस्तक प्रदर्शनी: सभी विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई। जिसमें गांधी जी का वांग्मय, दिग्विजय बाबू द्वारा लिखित पुस्तक लोकसभा डिबेट,आध्यात्मिक पुस्तकों में चारों वेद, पुराण, रामचरितमानस, बाल्मीकि रामायण, गीता महाभारत, कुरान जैसी पुस्तकों का शिक्षकों ने अवलोकन किया। साहित्यिक ग्रंथों का भी अच्छा संकलन उपलब्ध था।

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शोधार्थियों के लिए सभी विषयों के कई संदर्भ ग्रंथ भी प्रदर्शनी में रखे गए थे। सभी शिक्षकों एवं पाठकों ने प्रदर्शनी में लगाई गई पुस्तकों को काफी ज्ञानवर्धक और शोध के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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इस अवसर पर पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ पूनम कुमारी, सबिता कुमारी, ललिता देवी, हरि कुमार पासवान, अशोक ठाकुर, प्रियंका कुमारी, नीतू कुमारी, डॉ अनिल ने पुस्तक प्रदर्शनी के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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शिक्षकों में डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता, डॉ सत्येंद्र प्रसाद सिंह, डॉ आर एन ओझा, डॉ संजय कुमार सुमन, डॉ एम एन रजवी, डॉ राजीव कुमार, डॉ नेयाज अहमद, डॉ सरोज पाठक, डॉ नीरज मिश्रा, डॉ मनोज कुमार सिंह, डॉ आशीष कांता, डॉ अजमत अली, डॉ अनुपम कुमार, डॉ ललित किशोर, डॉ मनीष कुमार शर्मा, डॉ रजनीकांत पांडे, डॉ प्रियंका दिक्षित, डॉ सारिका चौरसिया, डॉ कृतिका वर्मा, डॉ आयशा जमाल, डॉ सुमनलता, डॉ मंजरी आनंद, डॉ श्रुति मिश्रा, डॉ विवेक मिश्रा, डॉ दिनेश तिवारी, डॉ वंदना, डॉ अंजनी शुक्ला आदि मौजूद थे।