Muzaffarpur News
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Muzaffarpur 6 October : RDS College के राजनीति विज्ञान विभाग, गणित विभाग एवं आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा: अतीत से वर्तमान तक” विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन कृष्ण सभा भवन में किया गया।

RDS College में “भारतीय ज्ञान परंपरा: अतीत से वर्तमान तक” विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित विशिष्ट संगोष्ठी में मुख्य वक्ता श्री रुपेश कुमार चतुर्वेदी, आईआईटी पटना, भारतीय ज्ञान परंपरा सेल के संसाधन पुरुष ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा जिज्ञासा, तर्क और स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहित करती है। इस परंपरा में उपनिषदों से लेकर शास्त्रार्थ की परंपरा तक संवाद के माध्यम से ज्ञान की खोज को विशेष महत्व दिया गया है। यह परंपरा मानव के अंदर स्वीकृति का भाव पैदा करती है, जो ज्ञान विस्तार का माध्यम बनती है।

तर्क और विमर्श के आधार पर विचारों की परख तथा सत्य का अन्वेषण भारतीय ज्ञान परंपरा की विशिष्ट पहचान है।
पाश्चात्य विद्वानों में सर विलियम जोन्स, मैक्स मूलर, कोलब्रुक, मेगास्थनीज आदि ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल धार्मिक या आध्यात्मिक विरासत नहीं, बल्कि भाषा, दर्शन, इतिहास, गणित और तर्क- विमर्श की समृद्धि बौद्धिक परंपरा भी है।

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RDS College में "भारतीय ज्ञान परंपरा: अतीत से वर्तमान तक" विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान
RDS College में “भारतीय ज्ञान परंपरा: अतीत से वर्तमान तक” विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान

भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता से मानी जा सकती है। इस सभ्यता में नगर नियोजन, जल प्रबंधन, कृषि, शिल्प, व्यापार और स्थापत्य कौशल का विकसित स्वरूप दिखाई देता है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की पुरातात्विक सामग्री तत्कालीन समाज की वैज्ञानिक एवं तकनीकी समझ को दर्शाती है।
डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति को कर्तव्य, अनुशासन, नैतिकता, सह अस्तित्व और लोक कल्याण की भावना से जोड़ती है।

अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकृति, समाज और समस्त जीव-जगत के प्रति सह अस्तित्व और संवेदनशीलता की भावना पैदा करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा में भोजन और वस्त्र को जीवन पद्धति और संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। इस परंपरा में सात्विक भोजन को शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का आधार माना गया है। वर्तमान समय में शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने की जरूरत है।

शिक्षकों में डॉ अनुराधा पाठक, डॉ नीरज कुमार मिश्रा, विद्यार्थियों में पुतुल कुमारी, प्रीति कुमारी एवं अन्नु कुमारी ने मुख्य वक्ता से ज्ञान परंपरा से संबंधित सवाल भी पूछे।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश डॉ रजनीकांत पांडे ने कराया। मंच संचालन डॉ नीरज कुमार मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन डॉ आलोक त्रिपाठी ने किया।

संगोष्ठी में डॉ रमेश प्रसाद गुप्ता,डॉ एम एन रजवी, डॉ राजीव कुमार, डॉ आरती कुमारी, डॉ स्नेह लता, डॉ आयशा जमाल, डॉ अनुराधा पाठक, डॉ नीरज कुमार मिश्रा, डॉ आलोक त्रिपाठी, डॉ प्रियंका दिक्षित, डॉ रजनीकांत पांडे, डॉ श्रुति मिश्रा, डॉ सौरभ राज, डॉ भगवान कुमार, डॉ ललित किशोर, डॉ पंकज तिवारी, डॉ विकास कुमार, डॉ सी के झा, डॉ अमर ज्योति रंजन, डॉ चौधरी संजय कुमार, डॉ नेयाज अहमद, डॉ बिंदु एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Goltoo

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।

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