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RDS College में कार्यशाला : पीजी छात्रों को शोध लेखन, साइटेशन और ऐतिहासिक साक्ष्य विश्लेषण का प्रशिक्षण

RDS College में कार्यशाला : पीजी छात्रों को शोध लेखन, साइटेशन और ऐतिहासिक साक्ष्य विश्लेषण का प्रशिक्षण RDS College में कार्यशाला : पीजी छात्रों को शोध लेखन, साइटेशन और ऐतिहासिक साक्ष्य विश्लेषण का प्रशिक्षण
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Muzaffarpur 2 April : RDS College में पीजी थर्ड सेमेस्टर छात्रों के लिए आयोजित कार्यशाला में ऐतिहासिक साक्ष्यों के विश्लेषण, प्राथमिक-द्वितीयक स्रोतों के उपयोग, सही साइटेशन, अकादमिक लेखन और प्रोजेक्ट फाइल तैयार करने के व्यावहारिक तरीकों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

RDS College में कार्यशाला

RDS College में पीजी थर्ड सेमेस्टर के छात्रों के लिए आयोजित कार्यशाला में ऐतिहासिक साक्ष्यों के विश्लेषण, प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के उपयोग, सही साइटेशन तथा अकादमिक लेखन कौशल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही स्थानिक एवं मौखिक इतिहास, डेटा विश्लेषण और प्रभावी ढंग से प्रोजेक्ट फाइल तैयार करने के व्यावहारिक तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया।

RDS College में कार्यशाला : पीजी छात्रों को शोध लेखन, साइटेशन और ऐतिहासिक साक्ष्य विश्लेषण का प्रशिक्षण
RDS College में कार्यशाला : पीजी छात्रों को शोध लेखन, साइटेशन और ऐतिहासिक साक्ष्य विश्लेषण का प्रशिक्षण

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वरिष्ठ शिक्षक एवं सीनेट सदस्य डॉ संजय कुमार सुमन ने कहा कि शोध लेखन में इतिहास की प्रासंगिकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतिहास अतीत की घटनाओं, संस्कृतियों और मानवीय अनुभवों का विश्लेषण कर वर्तमान संदर्भ को समझने, नीति निर्धारण में सुधार करने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अनिवार्य भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों में आलोचनात्मक सोच, साक्ष्य आधारित विश्लेषण और सामाजिक-आर्थिक विकास के पैटर्न को समझने की क्षमता विकसित करती हैं, जिससे बेहतर भविष्य के निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

विभागाध्यक्ष डॉ एम. एन. रजवी ने कहा कि असाइनमेंट लेखन में प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों का सही उपयोग करते हुए मानवीय गतिविधियों और ऐतिहासिक घटनाओं का सटीक पुनर्निर्माण एवं व्याख्या करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला में डॉ अजमत अली, डॉ अनुपम कुमार, डॉ ललित किशोर और डॉ रविंद्र कुमार ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में डॉ ललित किशोर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।