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SKJ Law College मुजफ्फरपुर में ‘शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता’ पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

SKJ Law College राष्ट्रीय सेमिनार SKJ Law College राष्ट्रीय सेमिनार
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Muzaffarpur 14 February : SKJ Law College, मुजफ्फरपुर में “आज के समय में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता: चुनौतियां और उपाय” विषय पर सेमिनार आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि न्यायिक दंडाधिकारी मणिशंकर मणि ने न्याय में देरी की समस्या और उसके समाधान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कॉलेज प्रशासन, शिक्षक एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

SKJ Law College राष्ट्रीय सेमिनार

SKJ Law College मुज. में एक सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसका विषय था :”आज की समय में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता :चुनौतिया और उपाय ” l

इस कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य अतिथि, श्री मणिशंकर मणि, न्यायिक दंडाधिकारी, सिविल कोर्ट मुजफ्फरपुर के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया, जिसमे महाविद्यालय के निदेशक श्री जयंत कुमार, प्राचार्य डॉ. के. के. एन. तिवारी, प्रो. बी. एम. आज़ाद, प्रशासक डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. एस. पी. चौधरी, प्रो. पंकज कुमार, प्रो. आर. ए. सहाय, नैक कॉर्डिंनेटर प्रो. आशुतोष कुमार तथा सेमिनार सेल के संयोजक प्रो. धनंजय पाण्डेय इत्यादि उपस्थित थे l

SKJ Law College राष्ट्रीय सेमिनार
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इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के निदेशक श्री जयंत कुमार ने स्वागत सम्बोधन करते हुए न्यायालय में वादों की शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा किये l प्राचार्य डॉ. के. के. एन. तिवारी ने अपने सम्बोधन में कहा किभारतीय न्याय प्रणाली में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 जैसे नए कानूनों के माध्यम से जाँच और परिक्षण में समय सीमा तय क़ी जानी चाहिए l

SKJ Law College राष्ट्रीय सेमिनार
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मुख्य अतिथि श्री मणिशंकर मणि ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में शीघ्र सुनवाई को स्पष्ट करते हुए कहा कि बिना किसी आवश्यक देरी के आपराधिक मामलो का निपटारा करना l यह न्याय के सिद्धांत “न्याय में देरी, न्याय से वंचित होना ” पर आधारित है l आगे उन्होंने चुनौतियों और समाधानो पर चर्चा करते हुए कहा कि अदालतो में करोड़ो मामले लंबित है, जिससे मुख्य कार्य प्रभावित होता है जैसे अधिवक्ताओ के उपेक्षा पूर्ण व्यवहार, चार्जशिट दाखिल करने में आवश्यक देरी, जज और जनसंख्या के अनुपात में कमी होना इत्यादि l शीघ्र सुनवाई हेतु अदालतो में जजों कि संख्या बढ़ाना, तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना, लोक अदालत और मध्यस्थता किबैठको को बढ़ाना और फास्ट ट्रैक कॉर्ट्स कि स्थापना इत्यादि पर ध्यान देने की आवश्यकता है l

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प्रो. धनंजय पाण्डेय ने कहा कि केवल कानूनी बनाने से नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे में सुधारऔर तकनिकी एकीकरण से ही न्याय में देरी कि समस्या को दूर किया जा सकता है l

अन्य वक्ताओ में महाविद्यालय के प्रशासक डॉ. रत्नेश कुमार, वरीय शिक्षक डॉ. एस. पी. चौधरी, प्रो. आर. ए. सहाय, प्रो. आशुतोष कुमार, प्रो. पंकज कुमार, प्रो. विश्वजीत कुमार, डॉ. मधु कुमारी इत्यादि थे l

इस कार्यक्रम में सभी शिक्षक, कर्मचारी, एवं छात्र -छात्राएं उपस्थित रहे, जिसमे डॉ. रविरंजन राय, डॉ. सत्यब्रत, प्रो. विपिन कुमार, प्रो. देवाशीष, प्रो. रूपा झा, प्रो. सौम्या साक्षी, श्री उज्जवल कुमार, तथा बिट्टू कुमार इत्यादि थे l

इस सेमिनार के मंच संचालन प्रो. अरुण कु.पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. बी. एम. आज़ाद ने किया lमुजफ्फरपुर में ‘शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता’ पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

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