Muzaffarpur 13 April : Bihar University Teachers 40 Hour Rule -बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के लिए हफ्ते में 40 घंटे काम, रोजाना कैंपस उपस्थिति और 180 कार्यदिवस अनिवार्य कर दिए गए हैं। BRABU में अब शिक्षकों को डेली क्लास रूटीन, आने-जाने का समय और पढ़ाए गए अध्याय की रिपोर्ट भेजनी होगी।
University Teachers कम से कम 40 घंटे काम
University Teachers और कॉलेजों में अब शिक्षकों के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्यपाल सचिवालय के नए आदेश के मुताबिक, अब सभी पूर्णकालिक शिक्षकों को हफ्ते में कम से कम 40 घंटे काम करना जरूरी होगा। इसे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
University Teachers 40 Hour Rule
7 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि हर शिक्षक को रोज कम से कम 5 घंटे कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपस में रहना होगा। वहीं, पूरे हफ्ते के 40 घंटे को अगर 6 दिनों में बांटा जाए, तो शिक्षकों को हर दिन करीब 6 घंटे 40 मिनट कैंपस में मौजूद रहना पड़ेगा।
सरकार और कुलाधिपति सचिवालय का कहना है कि तय समय तक कैंपस में रहने से पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा। इससे न सिर्फ क्लास नियमित होंगी, बल्कि छात्र भी शिक्षकों से आसानी से मिल सकेंगे। साथ ही प्रशासनिक काम और पढ़ाई की योजना भी समय पर हो सकेगी।

अब साल में 180 दिन पढ़ाई जरूरी
नई व्यवस्था के तहत यह भी तय किया गया है कि हर शैक्षणिक साल में कम से कम 180 कार्यदिवस यानी 30 हफ्ते तक यह नियम लागू रहेगा। इसका मतलब है कि पहले की तरह मिलने वाली तैयारी छुट्टी या लचीले शैक्षणिक ब्रेक अब कम हो सकते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों का माहौल पहले से ज्यादा ऑफिस जैसे अनुशासित मॉडल में बदल सकता है।
BRABU में रोजाना रिपोर्ट भेजनी होगी
मुजफ्फरपुर के B.R.A. Bihar University (BRABU) ने इस आदेश को और सख्ती से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। कॉलेजों से कहा गया है कि वे शिक्षकों की रोजाना रिपोर्ट रजिस्ट्रार के ईमेल पर भेजें।
इस रिपोर्ट में शामिल होगा:
- क्लास रूटीन
- किस समय शिक्षक आए और गए
- रोज कौन सा अध्याय पढ़ाया गया
- अन्य जरूरी टिप्पणियां
यानी अब सिर्फ उपस्थिति ही नहीं, बल्कि रोज पढ़ाए गए टॉपिक का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा।
शिक्षकों में बहस तेज
इस फैसले को लेकर University Teachers और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे छात्रों के हित में अच्छा कदम बता रहे हैं, क्योंकि इससे क्लास नियमित होंगी और पढ़ाई में पारदर्शिता आएगी।
वहीं दूसरी ओर कई शिक्षक मानते हैं कि इससे रिसर्च, लाइब्रेरी स्टडी और फील्डवर्क जैसे जरूरी अकादमिक काम प्रभावित हो सकते हैं। खासकर रोजाना अध्याय और विषय की रिपोर्टिंग को कुछ लोग शिक्षकों की स्वतंत्रता में दखल मान रहे हैं।
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— RAJESH GOLTOO (@GOLTOO) April 12, 2026
वेबसाइट पर भी दिख सकता है डेटा
सूत्रों के मुताबिक आगे चलकर विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट पर भी यह जानकारी डाल सकते हैं कि किस शिक्षक ने कितनी क्लास ली और कौन सा विषय पढ़ाया। अगर ऐसा हुआ तो छात्र और अभिभावक भी पढ़ाई की वास्तविक स्थिति देख सकेंगे।
कुल मिलाकर, बिहार का यह नया 40 घंटे वाला फैकल्टी नियम उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब देखना यह होगा कि इससे पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ती है या शिक्षकों की रिसर्च स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।

Goltoo Singh Rajesh – डिजिटल पत्रकार
गोल्टू सिंह राजेश पिछले पाँच वर्षों से डिजिटल माध्यम में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अपनी स्वयं की वेबसाइट पर समाचार प्रकाशित कर की। वर्तमान में वे डिजिटल पत्रकारिता के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और खेल-कूद से जुड़ी खबरों पर विशेष ध्यान देते हैं। मुज़फ़्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय समाचारों को वे नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते रहते हैं, तथा देश-विदेश की ब्रेकिंग और प्रमुख समाचारों को भी प्रकाशित करते हैं।