www.goltoo.in

बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम (University Act 2026) पर बढ़ा विवाद, स्वायत्तता के मुद्दे पर शिक्षकों और कर्मचारियों का संयुक्त आंदोलन तेज

August 4, 2026 | by Goltoo

act12

Muzaffarpur/Patna 4 August : University Act 2026 के विरोध में शिक्षकों और कर्मचारियों का आंदोलन तेज। 5 अगस्त से चरणबद्ध विरोध, 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश और प्रदर्शन।

University Act 2026 पर बढ़ा विवाद

बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 (University Act 2026) को लेकर राज्य के विश्वविद्यालयों में विरोध का स्वर तेज हो गया है। शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का कहना है कि प्रस्तावित विधेयक विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है। इसी मुद्दे पर 1 अगस्त 2026 को मुजफ्फरपुर के एम.पी. साइंस कॉलेज में विभिन्न शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की।

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बना आंदोलन का मुख्य मुद्दा

संयुक्त संघर्ष समिति का दावा है कि प्रस्तावित University Act 2026 विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक स्वायत्तता को सीमित कर सकता है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली, पाठ्यक्रम निर्माण, शोध और प्रशासनिक निर्णयों पर बाहरी हस्तक्षेप की आशंका बढ़ सकती है। समिति ने इसे उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताते हुए व्यापक विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा, 5 अगस्त से काला बैज और 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश

संघर्ष समिति ने आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके तहत 5 से 8 अगस्त 2026 तक शिक्षक एवं कर्मचारी अपने नियमित कार्य करते हुए काला बैज लगाकर विरोध दर्ज करेंगे। इसके बाद 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश लेकर सुबह 11 बजे एल.एस. कॉलेज परिसर स्थित महात्मा गांधी पार्क से विश्वविद्यालय मुख्यालय तक प्रदर्शन और मार्च निकाला जाएगा। यह कार्यक्रम शाम तक चलने की योजना है।

University Act 2026 : शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का अभूतपूर्व संयुक्त मोर्चा
University Act 2026 : शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का अभूतपूर्व संयुक्त मोर्चा

इसके अतिरिक्त 11 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 1:30 बजे से 2:00 बजे तक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जागरूकता सभाएं और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि आंदोलन को निरंतर गति मिल सके।

University Act 2026 : शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का अभूतपूर्व संयुक्त मोर्चा

इस आंदोलन की विशेषता यह है कि इसमें विश्वविद्यालयों के शिक्षक संगठनों के साथ-साथ शिक्षकेत्तर कर्मचारी संगठन भी एक मंच पर आए हैं। आंदोलन का नेतृत्व डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता, प्रो. ललन कुमार झा, राम कुमार और राजीव रंजन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि कर रहे हैं।

संयुक्त संघर्ष समिति का मानना है कि उच्च शिक्षा से जुड़े सभी वर्गों की एकजुटता इस बात का संकेत है कि प्रस्तावित विधेयक को लेकर व्यापक चिंता व्याप्त है। हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

शिक्षक दिवस पर जनता और अभिभावकों को जोड़ने की तैयारी

आंदोलन को केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित न रखते हुए संघर्ष समिति ने 5 सितंबर 2026 (शिक्षक दिवस) को विशेष जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और आम नागरिकों के साथ संवाद, संगोष्ठी और परिचर्चा आयोजित करने की योजना है।

समिति का कहना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रस्तावित अधिनियम के संभावित प्रभावों की जानकारी समाज तक पहुंचाई जाएगी तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के समर्थन में जनमत तैयार किया जाएगा। साथ ही प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी इस विषय को व्यापक स्तर पर उठाने की अपील की गई है।

आगे क्या?

फिलहाल बिहार में विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को लेकर सरकार और शिक्षकों के बीच मतभेद स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। एक ओर सरकार इसे उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रयास बता सकती है, वहीं आंदोलनकारी संगठन इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए चुनौती मान रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच संवाद या आंदोलन की दिशा बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

RELATED POSTS

View all

view all