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LS College में 134वाँ राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस (डॉ. एस.आर. रंगनाथन का जन्मदिन) बड़े उत्साह के साथ मनाया गया

August 12, 2026 | by Goltoo

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Muzaffarpur 12 August : LS College में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के तत्वावधान में 134वाँ राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस (डॉ. एस.आर. रंगनाथन का जन्मदिन) बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।

LS College में 134वाँ राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस

इस अवसर पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। पुस्तकालय के विकास में डॉ. एस.आर. रंगनाथन का योगदान, कोलन वर्गीकरण का विशेष संदर्भ विषयक सेमिनार अध्यक्षता करते हुए प्राचार्या प्रो. कनुप्रिया ने डॉ. एस.आर. रंगनाथन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे केवल पुस्तकालय विज्ञान के जनक ही नहीं, बल्कि ज्ञान के लोकतंत्रीकरण के महान योद्धा थे। उनके वर्गीकरण प्रणाली ने पूरी दुनिया के पुस्तकालयों को वैज्ञानिक आधार दिया।

प्रो. कनुप्रिया ने कहा कि LS College की केंद्रीय लाइब्रेरी मात्र पुस्तकों का भंडार नहीं, बल्कि बिहार की शैक्षिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह पुस्तकालय दशकों से ज्ञान की ज्योति जलाए हुए है और यहाँ संग्रहित दुर्लभ पुस्तकें, पुरानी पत्रिकाएँ तथा ऐतिहासिक दस्तावेज हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि इस विरासत को संरक्षित रखते हुए हम इसे आधुनिक डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।

LS College
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डिजिटाइजेशन और ऑटोमेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह पुस्तकालय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान का अमूल्य खजाना बन जाएगा। प्रो. कनुप्रिया ने आगे कहा कि इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं जिससे लंगट सिंह महाविद्यालय की लाइब्रेरी एक डिजिटल ज्ञान केंद्र बने, जहाँ पारंपरिक साहित्य और आधुनिक ई-संसाधनों का सुंदर समन्वय हो। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे पुस्तकों को अपना सच्चा मित्र बनाएँ, क्योंकि पुस्तकें ही चरित्र निर्माण और लक्ष्य प्राप्ति का सबसे मजबूत आधार हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. कौशल किशोर चौधरी ने कहा कि रंगनाथन का कोलन वर्गीकरण केवल एक वर्गीकरण प्रणाली नहीं, बल्कि ज्ञान को व्यवस्थित करने का एक दर्शन है। डॉ. चौधरी ने कहा कि पुस्तकालय तभी सार्थक होते हैं जब उनमें गुणवत्तापूर्ण साहित्य का उचित व्यवस्थापन और उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवाएँ हों।

मुख्य वक्ता डॉ. अभय चौरसिया, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, केन्द्रीय पुस्तकालय, दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने व्याख्यान में कहा कि डॉ. रंगनाथन ने पुस्तकालय को केवल पुस्तकों का भंडार नहीं, बल्कि ज्ञान का जीवंत केंद्र बनाया। कोलन वर्गीकरण की लचीली संरचना आज भी आधुनिक डिजिटल पुस्तकालयों और मेटाडेटा सिस्टम के लिए प्रेरणा स्रोत है।

संचालन करते हुए विभाग के समन्वयक डॉ शशिकांत पाण्डेय ने कहा कि ई-साहित्य उपलब्ध होने के बावजूद पारंपरिक पुस्तकालयों की भूमिका कम नहीं हुई है, बल्कि दोनों का समन्वय ही भविष्य है। धन्यवाद ज्ञापन रोहित कुमार ने किया। मौके पर कॉलेज के लाइब्रेरियन डॉ मनोज कुमार शर्मा, ऋषि कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।

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