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B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन

January 9, 2026 | by Goltoo

B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन

Muzaffarpur 9 January: B.R.A. Bihar University के संस्कृत विभाग में आयोजित व्याख्यान में पुराणों की वर्तमान समाज में उपयोगिता, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना पर विस्तार से चर्चा की गई।

B.R.A. Bihar University संस्कृत विभाग में व्याख्यान

B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन
B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन

बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” विषय पर एक विशेष शैक्षणिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध संस्कृत विद्वान एवं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजीव रंजन प्रसाद रहे। उन्होंने अपने सारगर्भित वक्तव्य में पुराणों की ऐतिहासिक विश्वसनीयता, उनकी कथात्मक शैली तथा समकालीन समाज में उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन
B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र राय ने संस्कृत विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना करते हुए विभागीय विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने प्रस्तावित व्याख्यान माला के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन
B.R.A. Bihar University में “पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता” पर व्याख्यान का आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्याम बाबू शर्मा ने की। स्वागत भाषण पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनोज कुमार द्वारा दिया गया, जबकि विषय प्रवर्तन एवं मंच संचालन का दायित्व विभागीय प्रतिनिधि द्वारा निभाया गया। व्याख्यान में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति उत्साहजनक रही।

इस अवसर पर मानविकी संकाय के विभिन्न विभागाध्यक्ष, शिक्षक, सेवानिवृत्त पूर्व अध्यक्ष तथा विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में मानवीय मूल्यों के क्षरण से पारिवारिक विघटन, सामाजिक तनाव, नैतिक पतन, क्षेत्रवाद, जातिवाद, आतंकवाद, राजनीतिक व आर्थिक विकृतियां तथा पर्यावरणीय संकट जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले रही हैं। ऐसे में पुराणों में निहित जीवन मूल्य और सांस्कृतिक आदर्श समाज को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि जहां वेदों की भाषा जटिल है, वहीं पुराण सरल कथानकों के माध्यम से गूढ़ अर्थों को सामान्य जन तक पहुंचाने में सक्षम हैं। कुल मिलाकर यह व्याख्यान ज्ञानवर्धक, विचारोत्तेजक और अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध हुआ।

संयोजिका प्रोफेसर नीभा शर्मा के द्वारा मंच – संचालन एवं विषय -प्रवर्त्तन किया गया। डॉक्टर मनीष झा का सफल संचालन में में सक्रिय एवं महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

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